कोल्डड्रिंक में भारी मात्रा में शर्करा होती है, जिससे मोटापा और यूरिक एसिड भी बढ़ता है। यूरिक एसिड बढ़ने पर ये जोड़ों में रुकने लगता है और किडनी पर इसे बाहर निकालने के लिए अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इससे गुर्दे की क्षमता प्रभावित होती है। गुर्दों में सूजन, सिकुड़न आने के कारण उसकी कार्यक्षमता घट जाती है। धीरे-धीरे गुर्दे रक्त से अपशिष्ट और अतिरिक्त तरल पदार्थ निकालने और मूत्र बनाने में असमर्थ हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में किडनी ट्रांसप्लांट या डायलिसिस की नौबत आ जाती है। ऐसे ही युवा हर महीने हैलट पीजीआई पहुंच रहे हैं, जिन्हें किडनी ट्रांसप्लांट और डायलिसिस कराने की सलाह दी जा रही है। उनके अनुसार, पिछले पांच से छह साल में बड़ा बदलाव आया है। अब 20 से 30 साल उम्र के युवा क्रोनिक किडनी रोगी बड़ी संख्या में अस्पताल पहुंच रहे हैं।