दीपावली रात्रि का त्योहार है और इसका मुख्य पूजन रात्रि में अमावस्या के समय किया जाता है। अमावस्या की तिथि में प्रदोष काल का विशेष महत्व होता है। प्रदोष काल वह समय है जब सूर्यास्त के बाद लगभग 2 घंटे 24 मिनट तक की अवधि होती है।
शास्त्रों के अनुसार, जिस दिन अमावस्या प्रदोष काल और महानिशिथ काल में व्याप्त होती है, उसी दिन दीपावली का पर्व मनाना चाहिए। 31 अक्टूबर को अमावस्या की शुरुआत दोपहर में हो रही है, जो पूरी रात तक रहेगी, वहीं, 1 नवंबर को सूर्यास्त के बाद अमावस्या समाप्त हो जाएगी। प्रदोष और अर्धरात्रि व्यापनी मुख्य है,इसलिए दीपावली 31 को मनाई जाएगी।
इसके साथ ही धनतेरस का पर्व 29 अक्टूबर को,नरक चतुर्दशी (छोटी दीपावली) 30 अक्टूबर, दीपावली का महापर्व 31 अक्टूबर,1 नंवबर को स्नान दान की अमावस्या,2 नवंबर को गोर्वधन पूजा और 3 नवंबर को भाई दूज का पर्व मनाया जाएगा।