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NEEMUCH NEWS: किसानों की समस्याओं को लेकर किसान संघ ने रैली निकाल दिया ज्ञापन,..

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नीमच : भारतीय किसान संघ नीमच ने किसानों की समस्याओं के निराकरण की मांग को लेकर आज दशहरा मैदान में एकत्रित होकर रैली निकाली
एवं सोयाबीन, मक्का आदि फसलों का समर्थन मूल्य बढ़ाने, अफीम का दाम बढ़ाने, नवीन कृषि उपज मंडी में शीघ्र सभी उपज का नीलाम प्रारंभ करवाने आदि मांगों को लेकर जिला कलेक्टर को प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन दिया गया।ज्ञापन में कहा गया है कि मध्य प्रदेश सोयाबीन उत्पादक राज्य है, लागत के अनुपात में सोयाबीन का समर्थन मूल्य बहुत कम है, इसे कम से कम . 6000/- प्रति क्विटल कर घोषित समर्थन मूल्य पर खरीदी सुनिश्चित की जाए । अफीम नीति 2024-25 किसान हितेशी हो जिसमें लायसेंसों की संख्या बढ़ाना (चीरा एवं सी.पी.एस. पद्धति), अफीम का मूल्य 10.000 रु. प्रति किलो, सी.पी.एस. पद्धति के डोड़ो का मूल्य 1000 रु. प्रति किलो, 1995 से कटे हुए पट्टे बहाल करना, डोड़ा चूरा 500 रु. प्रति ‘खरीदी, बहुमत के आधार पर नामांतरण आदि शामिल किया जायें। कपास का समर्थन मूल्य 10000 किया जाए। मक्का का समर्थन मूल्य 2500 कर खरीदी सुनिश्चित की जाए। कृषि उपज का लागत आधार पर लाभकारी मूल्य दिया जाए।
कृषि का बजट अलग से बनाया जाए। केन्द्र सरकार द्वारा बलराम जयंती को किसान दिवस घोषित किया जाए । प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को किसान हितैषी बनाया जाए ।.
इस हेतु नीति परिवर्तन के लिए केन्द्रीय स्तर की जब कमेटी कृषि मंत्री की अध्यक्षता में गठित हो, जिसमें भारतीय किसान संघ की भागीदारी रहे कमेटी अपनी रिपोर्ट आगामी खरीफ फसल के समय लागू करवाए ।
शासन की मनरेगा योजना को कृषि से जोड़ा जाने, विकासखण्ड, तहसील, मण्डी स्तर पर एक ऐसी लैब हो जिसमें किसान खाद दवाई की जांच करवा सके, जल नीति सन् 2012 की जल नीति को हटाकर पानी का उपयोग पीने के लिए प्रथम तथा कृषि कार्य के लिए द्वितीय माना जाए। भारतीय गौवंश आधारित कृषि को प्रोत्साहित किया जाए। जंगली जानवर एवं आवारा पशुओं से फसलों में होने वाले नुकसान की क्षतिपूर्ति दी जाए, किसानों को फैंसिंग के लिए 80 प्रतिशत अनुदान दिया जाए । किसानों को सब्जी परिवहन हेतु यात्री ट्रेनों में दो लोडिग बोगी लगाई जाए। सभी फसल हेतु फूड प्रोसेसिंग प्लाट लघु उद्योग ग्राम स्तर पर अधिक अनुदान देकर लगवाए जाएं तथा किसानों को प्रशिक्षण दिये जाएं। लघु उद्योग में बिजली का एवरेज बिल बंद कर खपत के आधार पर दिया जाए ।
राष्ट्रीयकृत बैंकों द्वारा किसानों को क्रेडिट कार्ड पर रु. 500000 /- तक बिना ब्याज के ऋण उपलब्ध करवाया जाए उससे ऊपर की लिमिट सीमा हटाई जाए। ग्रामों में निवासरत किसानों को उद्योग व्यवसाय तथा गृह निर्माण हेतु ऋण सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
नाबार्ड द्वारा संचालित बैंकों की व्यवस्था को आधुनिकीकरण किया जाए। बैंकों से जुड़ी ग्रामीण स्तर की सहकारी संस्थाओं को बैंक प्रणाली (कियोस्क) से जोड़कर छोटी बैंक बनाई जाए । राष्ट्रीयकृत बैंकों की शाखा बढ़ाई
जाए तथा सभी बैंकों में हिन्दी में कार्य हो । भूमि अधिग्रहण कानून किसान हितेषी बनाया जाए। अगर अति आवश्यक है तो मुआवजा पांच गुना दिया जाए ।

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