देश के गैंगस्टर अब आतंकियों की राह पर चलकर वारदात अंजाम देने लगे हैं। गैंगस्टरों ने न केवल वारदात का नया तरीका अपनाया है, बल्कि देश के बाहर भी लिंक बना रहे हैं। लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से जुड़े गोल्डी बराड़ व अनमोल बिश्नोई इसके उदाहरण हैं।
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि कुछ वर्षों से दिल्ली समेत पूरे देश के गैंगस्टर ने वारदात करने का नया तरीका अपना लिया है। अब गैंगस्टर जिसे मारना है, उसकी रेकी किसी और से करवाते हैं। हथियार कोई और लेकर आता है। हथियार एक जगह पर रख दिए जाते हैं। फिर हथियार कोई और उस जगह से लेकर जाता है शूटर कोई और होता है, गिरोह की आर्थिक मदद कोई और करता है। हत्या करने वालों को पनाह कोई और देता है। इससे एक वारदात में शामिल बदमाश एक-दूसरे को नहीं जान पाते। यही वजह है कि देश के गैंगस्टर दो गुटों में बंट गए हैं। आतंकी भी वारदात के लिए इसी तरह का तरीका अपनाते हैं।
वारदात करने वालों की चेन तोड़ देते हैं गैंगस्टर: गैंगस्टर वारदात करते हैं तो ये उनकी चेन तोड़ देते हैं, ताकि पुलिस उन तक न पहुंच पाए। आखिर तक ये पता नहीं चलता कि किसने किसकी हत्या करवाई और कौन सा गिरोह शामिल है। दिल्ली के ग्रेटर कैलाश में जिम मालिक नादिर शाह व मुंबई में एनसीपी नेता बाबा सिद्दीकी और पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्याएं यही तरीका अपनाकर की गई हैं। गैंगस्टर हत्या करने वाले शूटर को ये नहीं बताते कि किस की हत्या करनी है। ये इसलिए नहीं बताया जाता कि कहीं शूटर हत्या करने से मना न कर दे।
रोहिणी कोर्ट में कर दी थी हत्या: वर्ष 2016 में हरियाणा पुलिस की हिरासत से भागने के बाद जितेंद्र उर्फ गोगी अपने सबसे भरोसेमंद गुर्गों कुलदीप उर्फ फज्जा और रोहित उर्फ मोई के साथ 2020 में स्पेशल सेल की ओर से गिरफ्तार किए जाने से पहले दिनदहाड़े गोलीबारी की कई वारदात कर चुका था। मार्च 2021 में पुलिस की हिरासत से भागने वाले फज्जा को स्पेशल सेल ने मार गिराया। जितेंद्र की टिल्लू ताजपुरिया गिरोह के शूटरों ने रोहिणी कोर्ट में हत्या कर दी थी।

