उन्नाव दुर्घटना हादसे के बाद चहुंओर बचाओ-बचाओ… किसी ने अपनों को खोया तो?

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गंजमुरादाबाद एक्सप्रेसवे पर हुए हादसे ने यात्रियों को जीवन भर का गम दे दिया। किसी ने अपनों को खोया तो कोई हमेशा के लिए अपाहिज हो गया। हादसे के बाद चारों ओर से बस बचाओ-बचाओ की आवाजें आती रहीं। पुलिस और मौजूद लोग ढांढ़स बंधाते रहे।

बिहार के जहांगीरपुर निवासी रजनीश कुमार दिल्ली में मजदूरी करने के लिए जा रहा था। हादसे में उसने अपना दाहिना हाथ कंधे से और दाहिना पैर हमेशा के लिए खो दिया। वहीं बायां हाथ टूट गया। जिला अस्पताल में वह कराहता रहा। बार-बार यही कह रहा था कि अब उसके परिवार की देखभाल कैसे होगी। वह परिवार का इकलौता सहारा है। लोग उसे सांत्वना देते रहे और अंत में रेफर कर दिया गया।

वहीं दिल्ली में घरों में काम कर परिवार चलाने वाली शबाना बेटी नगमा और बहू चांदनी के साथ बिहार से दिल्ली जा रही थी। पति की मौत हो चुकी है। तीनों दिल्ली में घरों में काम कर परिवार चलाती हैं। उनके साथ नौ माह की पोती सनाया भी थी। घटना में ईश्वर ने पोती को तो बचा लिया। बच्ची की मां चांदनी के सिर में गंभीर चोट आई है। शबाना और नगमा भी घायल हैं।
घायलों में पिता, पुत्र, और दो भाई भी शामिल
हादसे में बिहार शिवहर के हिरौता दम्मा निवासी लालवाद दास और उनका बेटा रामप्रवेश के साथ साहिल और उसका भाई दिलशाद भी घायल हुए हैं। यह सभी दिल्ली में काम करते हैं। लालबाबू ने बताया कि काफी समय से वह बिहार अपने घर नहीं गए थे। । इसलिए बेटे के साथ घूमने आए थे।
एक ही परिवार के सात लोगों की मौत
एक्सप्रेसवे पर हुए हादसे में 18 यात्रियों ने जान गंवाई। जिसमें एक ही परिवार के सात लोग शामिल हैं। हादसे में उनके माता-पिता, भाई-बहन व चाचा चाची की मौत हो गई। लखनऊ आगरा एक्सप्रेस पर हुए हादसे में जान गंवाने वाले सभी 18 की पहचान हो गई है। इसमें एक ही परिवार के सात लोगों की मौत हुई है। इनमें बिहार प्रांत के जिला फनेहरा वार्ड नंबर 11 के मो. असफाक आलम (45), उनकी पत्नी मुनचुन खातून उर्फ रुबी (38), बेटी गुलनाज (13), बेटा सुहैल (5), अशफाक के भाई मो. इलियाश (35) उनकी पत्नी शमशुन्निशा उर्फ सोनी (30) की मौत हो गई।
अशफाक के दो बेटे दिलशाद व साहिल घायल हैं। पोस्टमार्टम हाउस में बैठे दिलशाद ने बताया कि वह परिवार के साथ मेरठ में रहते हैं। दिल्ली पहुंचने के बाद वहां से मेरठ जाना था। मेरठ में उनके पिता की कपड़ों की सिलाई की दुकान और सैलून का काम है। उसी में पूरा परिवार काम करता था व एक सप्ताह पहले परिवार संग गांव घूमने गया था।

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