झाबुआ। (ए पी न्यूज़ एक्सप्रेस कहते हैं हाथ कंगन को आरसी क्या” तो इसी कहावत को चरितार्थ कर रहा है झाबुआ का सामाजिक महासंघ जिसके प्रकल्प अपने आप में आम विचारधारा से पृथक होकर जन कल्याण की भावना के साथ उनके हित साधते नजर आते हैं। इस प्रकल्प को अपनी टीम के साथ मूर्ति रूप दे रहे महासंघ के अध्यक्ष ऊर्जावान युवा नीरज राठौर की सोच सदैव कुछ ऐसा करने की और अग्रसर रहती है जो महासंघ के माध्यम से जनकल्याण का पुण्य अर्जित कर सके जिसे वह सतत करते नजर आ रहे हैं। आदिवासी अंचल में आम आदमी के साथ ही आदिवासी कल्चर के साथ जुड़कर कार्य करना अपने आप में कठिन पथ है। उसके बावजूद उनमें विश्वास का बीजारोपण कर उन्हें मुख्य धारा से जोड़ने के प्रयास को नि संदेह स्तुत्य कहा जाना भी गलत नहीं होगा। जिसका निर्वाह झाबुआ का सामाजिक महासंघ सतत करता नजर आ रहा है। आज सोमवार 25 जून को पर्यावरण संरक्षण व उसे सहेजने की महती आवश्यकता को देखते हुए पौधे व सेट बाल वितरित कर आदिवासी क्षेत्र में हो रहे जंगलों के विनाश से पर्यावरण को बचाने का सराहनीय कार्य किया है। इस कार्यक्रम के दौरान उपस्थित जिला पुलिस अधीक्षक पदम विलोचन शुक्ल ने सामाजिक महासंघ की इस पहल को पर्यावरण के क्षेत्र में क्रांतिकारी कदम बताते हुए इसकी सराहना की। ग्रामीणों का भी उत्साह इस कार्यक्रम में पहुंचा और वे विभिन्न साधनों से सैकड़ो पौधे उनका रोपण करने के लिए लेकर गए। यही नहीं पौधे ले गए ग्रामीणों ने यह संकल्प भी लिया कि वह इन पौधों की सुरक्षा में कोई कसर बाकी नहीं रखकर खाद पानी देकर उन्हें पाल पोस कर बड़ा करेंगे। सामाजिक महासंघ पिछले 4 वर्षों में लगभग 50,000 पौधे एवं इस वर्ष 21000 पौधों के साथ कुल 71000 पौधों का वितरण कर चुका है । वितरण के लिए सकल व्यापारी सहकारी शाख संस्था झाबुआ ने 4000 पौधे महासंघ को भेंट किये जिनका वितरण किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित अतिथि वह अन्य गण मान्य नागरिकों ने महासंघ की इस पहल को सराहा है ।