इंदौर। पत्रकारिता लोगों तक समाचार पहुंचाने और जन-जागरण का माध्यम बने, लेकिन किसी भी व्यक्ति या पार्टी के जनसंपर्क का माध्यम न बने। सरकारें बनाना या गिराना मीडिया का काम नहीं है। पत्रकारिता आज भी समाप्त नहीं हुई है सिर्फ अच्छी पत्रकारिता की लोगों तक पहुंच थोड़ी मुश्किल हुई है।
ये बातें माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. (डॉ.) केजी सुरेश ने स्टेट प्रेस क्लब, मध्यप्रदेश द्वारा आम चुनावों में मीडिया की भूमिका विषय पर आयोजित परिसंवाद में मुख्य वक्ता के रूप में कहीं। दिल्ली में बैठकर पूरे देश की खबरें तैयार की जाती हैं। लाइब्रेरी जाने या संदर्भ रखने की परंपरा भी समाप्त हो गई है। उन्होंने कहा कि अच्छी पत्रकारिता समाप्त नहीं हुई। उन्होंने कहा कि मीडिया पार्टियों के प्रदर्शन, उनके द्वारा किए गए वादों के पूरा होने की स्थिति, प्रत्याशियों की पृष्ठभूमि आदि की जानकारी देकर जागरूकता बढ़ाएं लेकिन जनता की ओर से सोचने का काम कतई ना करे। आज पत्रकारिता पक्ष कारिता में बदल रही है, इसलिए गोदी मीडिया जैसी तोहमतें झेलनी पड़ती हैं। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि चुनावी पत्रकारिता का उद्देश्य किसी पार्टी की जीत नहीं बल्कि देश और लोकतंत्र की जीत होनी चाहिए।
इससे पूर्व विशेष वक्ता के रूप में अपने उद्बोधन में वरिष्ठ पत्रकार रमण रावल ने कहा कि राजनीतिक पत्रकारिता आसान नहीं होती। किसी दल या नेता अथवा मुद्दे के जनता पर असर का विश्लेषण भी करना होता है और किसी का पक्ष ना लेने की दुविधा भी रहती है, वरना पत्रकार पर ठप्पा लगने का अंदेशा रहता है। स्टेट प्रेस क्लब, मध्यप्रदेश द्वारा एमसीयू के साथ पत्रकारों के लिए विशेष दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया था। जिसके प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र भी इस आयोजन में डॉ. सुरेश ने प्रदान किए।