उज्जैन: अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रविंद्र पुरी 4 साल बाद होने वाले कुंभ की व्यवस्थाएं देखने उज्जैन पहुंचे। इस दौरान उन्होंने खुद को भगवान बताने वाले साधु – संतो के खिलाफ नाराजगी जाहिर की है। महाराज ने नाराजगी जाहिर कर कहा कि ‘आजकल ऐसा ट्रेंड चला है कि हर कोई अपने आप को उपासक-पुजारी नहीं, भगवान कह रहा है। खुद को ब्रह्मा, विष्णु, महेश और राम कह रहे हैं, ऐसे संतों पर कार्रवाई होना अति आवश्यक है। प्रयागराज के कुंभ में ऐसे व्यक्तियों को भूमि नहीं दी जाएगी।’ तीन अखाड़ों ने अपने 112 संतों को नोटिस दिया है। उज्जैन में 4 साल बाद कुंभ होना है। ऐसे में अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष यहां व्यवस्थाएं देखने आए। उन्होंने कहा, ‘हमारी सनातन संस्कृति के विरोध में जो जाएगा, उस पर कार्रवाई होगी। मंच से अल्लाह हू अकबर कहना, नमाज पढ़ना उचित नहीं है। मंच पर पति-पत्नी बैठकर शादी करें, ये चीजें अच्छी नहीं हैं। ऐसे संतों को चिह्नित किया जाएगा, जो सनातन के विरुद्ध कार्य कर रहे हैं।’ रविंद्र पुरी महाराज से नोटिस देने की वजह पूछी तो कहा- ये गुप्त मामला है। फिलहाल दो महीने पहले सिर्फ उज्जैन में महिला महामंडलेश्वर को निष्कासित किया गया है, अन्य किसी को नहीं। रविंद्र पुरी महाराज ने 6 महामंडलेश्वर को निष्कासित करने के संबंध में कहा कि फिलहाल दो महीने पहले सिर्फ उज्जैन में महिला महामंडलेश्वर को निष्कासित किया गया है, अन्य किसी को नहीं। 112 संतों को नोटिस देने के संबंध में उन्होंने कहा कि सभी अखाड़ों की अपनी व्यवस्था है। अखाड़े से संबंधित किसी संत को गलती करने पर उनके अखाड़े ने नोटिस जारी किया होगा और वही कार्रवाई भी करेंगे। जूना अखाड़े ने 54 संत, श्री निरंजनी अखाड़े ने 24 संतों और निर्मोही अनी अखाड़े ने 34 संतों को नोटिस थमाया है। संतों ने 30 सितंबर तक संतोषजनक जवाब नहीं दिया तो महाकुंभ-2025 में प्रवेश नहीं मिलेगा।