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तपस्वियों ने किये पारणे की सामूहिक क्षमा याचना , तपस्वियों का हुआ बहुमान,….

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झाबुआ (रिंकू जैन ): श्री जैन श्वेताबर मूर्ति पूजक श्री संघ के आठ दिवसीय महापर्व पर्यूषण पूर्णाहुति पर श्री संघ एवं बाहर से पधारे हुए सभी तपस्वियों के सामूहिक पालना उत्सव में 700 से अधिक तपस्वियों ने पारने कर नगर में कीर्तिमान स्थापित किया।
इस वर्ष झाबुआ मूर्ति पूजा के संघ में परम पूज्य गच्छाधिपति श्रीमद् विजय ज जयानंद सुरिश्वर जी महाराज साहब के शिष्य रत्न परम पूज्य आचार्य श्रीमद् विजय दिव्यानंद सुरिश्वर जी महाराज साहब का चातुर्मास प्रवत मान है, आपकी पावन निश्रा एवं सानिध्य में तप जप एवं धर्म आराधना के साथ संपन्न हुए जिसमे इस वर्ष भारत भर से पधारे 200 से अधिक गुरु भक्तों ने 8 दिन तक पूर्ण रूप से साधु जीवन का पालन करते हुए चोसठ प्रहरी पोषध व्रत रखें जो झाबुआ श्री संघ के इतिहास में प्रथम बार हुआ ।

700से अधिक पारने हुएसंवत्सरी महापर्व के पश्चात श्री संघ के सभी तपस्वियों के सामूहिक पारने का आयोजन श्रीमती वाली बाई समीर मल भंडारी की स्मृति में लाभार्थी यशवंत, निखिल शार्दुल जिन्नाश भंडारी परिवार की और से किया गया।
श्री संघ, चातुर्मास समिति एवं पारने के आयोजक भंडारी परिवार की और से उनका बहुमान कर प्रभावना वितरित की गई।
सामूहिक पारने के अवसर पर 25 से अधिक सामूहिक अठाई की तपस्या कर रहे तपस्वीयों का श्री जैन श्वेताबर महासंघ के प्रदेश संयोजक यशवंत भंडारी प्रदेश पदाधिकारी मनोहर मोदी की उपस्थिति में नगर संयोजक इंद्रसेन जैन, जिला कोषाध्यक्ष
रमेश जी जैन कटारिया,संदीप राज रतन जैन जिला उपाध्यक्ष कांतिलाल पगरिया राजेंद्र लालन,जिला महामंत्री सुनील संघवी जिला प्रबंधक राजेंद्र आर भंडारी नगर उपाध्यक्ष राजेंद्र जी जैन शुभम,संजय जगावत,नगर महामंत्री अशोक रुणवाल सह मंत्री विजय रुणवाल का मोतियों की माला पहिनाकर
बहुमान किया,

आयोजक परिवार की ओर से श्रीमती बिंदु भंडारी,श्वेता भंडारी, हिया भंडारी शार्दुल भंडारी जीनाश भंडारी ने अठाई एवं अठम के तपस्वीयों को पूजा का बेग प्रभावना स्वरूप भेंट किये
क्षमा वीरों का आभूषण है
संवत्सरी महापर्व के समापन के अवसर पर समूहिक क्षमा याचना करते हुए परम पूज्य आचार्य दिव्यानंद सुरिश्वर जी म सा ने कहा कि क्षमा वीरों का आभूषण है क्षमा करने वाला व्यक्ति का मन सदा सरल एवं निर्मल होता है, और आत्म कल्याण के पथ मै अग्रसर होने के लिए क्षमा का गुण होना सबसे जरूरी है,अतः आज सबको अपने अंतः करण से सभी जीवों से क्षमा याचना करनी चाहिए

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