बुलडोजर कार्रवाई पर भड़के ग्रामीण, रायपुर के नकटी गांव में तनाव का माहौल
रायपुर| छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के नकटी गांव में अतिक्रमण हटाने पहुंची पुलिस-प्रशासन की टीम और स्थानीय निवासियों के बीच जबरदस्त टकराव की स्थिति पैदा हो गई है। आज सुबह जब प्रशासन का अमला भारी पुलिस बल और बुलडोजर के साथ अवैध निर्माण ढहाने पहुंचा, तो ग्रामीण आक्रोशित हो गए और कार्रवाई के विरोध में सड़कों पर बैठ गए। इस दौरान ग्रामीणों और सुरक्षाकर्मियों के बीच तीखी बहस और झूमाझटकी भी देखने को मिली। प्रदर्शनकारी लगातार प्रशासनिक कार्रवाई के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं।
बुलडोजर के आगे अड़े ग्रामीण, पथराव की भी खबर
जैसे ही पीले पंजे (बुलडोजर) ने कार्रवाई शुरू की, उत्तेजित ग्रामीण मशीनों के सामने आकर खड़े हो गए और विरोध प्रदर्शन तेज कर दिया। इस हंगामे के बीच कुछ लोगों द्वारा बुलडोजर पर पथराव करने की बात भी सामने आई है। बताया जा रहा है कि इस प्रभावित क्षेत्र में करीब 70 से अधिक मकान बने हुए हैं। प्रशासन ने महज दो दिन पहले ही इन परिवारों को बेदखली का नोटिस थमाया था, जिसके तुरंत बाद आज यह कार्रवाई शुरू कर दी गई। बेघर होने के डर से परेशान ग्रामीणों का कहना है कि अचानक आशियाने उजड़ने के बाद वे इस बारिश के मौसम में कहां जाएंगे।
वैकल्पिक आवास में शिफ्टिंग की कवायद शुरू
तनावपूर्ण माहौल के बीच प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के सेक्टर-30 में स्थानांतरित (शिफ्ट) करने की प्रक्रिया भी समानांतर रूप से शुरू कर दी है। बेदखल किए जा रहे लोगों का घरेलू सामान ले जाने के लिए मौके पर बड़ी संख्या में सरकारी गाड़ियां तैनात की गई हैं, जिनमें सामान लादने का काम जारी है।
क्या है भूमि विवाद का मुख्य कारण?
इस पूरे विवाद को लेकर दोनों पक्षों के अपने-अपने तर्क हैं:
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ग्रामीणों का आरोप: स्थानीय निवासियों का दावा है कि राज्य सरकार उनके पूर्वजों की काबिज जमीन को खाली कराकर वहां विधायकों के लिए एक सर्वसुविधायुक्त आवासीय कॉलोनी विकसित करना चाहती है, इसलिए उन्हें जबरन हटाया जा रहा है।
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प्रशासन का पक्ष: हालांकि प्रशासनिक अधिकारियों ने इस दावे की पुष्टि नहीं की है। उनका कहना है कि ग्रामीणों ने सरकारी और चारे के लिए आरक्षित बड़ी भूमि पर अवैध रूप से कब्जा कर रखा है, जिसके चलते यह कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
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पीएम आवास पर भी संकट: ग्रामीणों के मुताबिक, 'शामिलात चारागाह' (सामुदायिक चराई भूमि) के रूप में दर्ज इस जमीन पर जो मकान बने हैं, उनमें से लगभग 30 घर खुद सरकार द्वारा 'प्रधानमंत्री आवास योजना' (PMAY) के तहत स्वीकृत और निर्मित किए गए हैं, जिन्हें अब अवैध बताया जा रहा है।

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