US-Iran शांति समझौता फाइनल, अब इसके क्रियान्वयन पर टिकी निगाहें
वर्साय (फ्रांस): मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में लंबे समय से जारी भारी तनाव और संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक मोड़ आया है। अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर औपचारिक रूप से मुहर लग गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस के वर्साय पैलेस में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ एक रात्रि भोज (डिनर) के अवसर पर इस महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस कदम के बाद दोनों देशों के आधिकारिक सूत्रों और मीडिया पोर्टलों ने भी पुष्टि कर दी है कि समझौते को अंतिम रूप दे दिया गया है और अब इसके व्यावहारिक क्रियान्वयन यानी जमीन पर उतारने का समय आ चुका है।
लेबनान संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य पर बनी सहमति
इस शांति समझौते के तहत स्विट्जरलैंड के जिनेवा में होने वाली औपचारिक बैठकें अपने निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ही जारी रहेंगी। इस बीच, दोनों देशों के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) और लेबनान के मोर्चे को लेकर भी बड़ी सहमति बनी है। समझौते के प्रावधानों के तहत ईरान तत्काल प्रभाव से होर्मुज जलडमरूमध्य को अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए खोल देगा। इसके साथ ही, लेबनान सहित सभी युद्धग्रस्त मोर्चों पर सैन्य कार्रवाइयों और अभियानों को पूरी तरह से रोक दिया जाएगा, जिससे पूरे क्षेत्र में शांति का माहौल तैयार हो सके।
परमाणु कार्यक्रम पर रोक और 300 अरब डॉलर का पुनर्निर्माण पैकेज
समझौते के सबसे महत्वपूर्ण सूत्रों के तहत ईरान ने इस बात को स्पष्ट रूप से स्वीकार किया है कि वह न तो परमाणु हथियार हासिल करेगा और न ही उनके विकास की दिशा में कोई कदम उठाएगा। इसके बदले में, अमेरिका ने ईरान को अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल बेचने की मंजूरी देने की बात कही है। इसके अतिरिक्त, युद्ध के कारण हुए नुकसान की भरपाई और देश के ढांचे को दोबारा खड़ा करने के लिए ईरान को पुनर्निर्माण के तहत कम से कम 300 अरब डॉलर (लगभग 25 लाख करोड़ रुपये) का वित्तीय पैकेज मिलेगा।
प्रतिबंधों की समाप्ति और संप्रभुता का सम्मान
समझौते की रूपरेखा के अनुसार, जैसे ही ईरान के परमाणु कार्यक्रम से संबंधित अंतिम नियम और शर्तें पूरी हो जाएंगी, अमेरिका तेहरान (ईरान) पर लगाए गए अपने सभी एकतरफा प्रतिबंधों के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र (UN) के प्रतिबंधों को भी पूरी तरह हटा लेगा। इसके अलावा, दोनों देश एक-दूसरे की क्षेत्रीय अखंडता, सीमाओं और संप्रभुता का पूरी तरह सम्मान करने तथा किसी भी देश के आंतरिक मामलों में दखल न देने के लिए प्रतिबद्ध हुए हैं। फिलहाल, आगामी 60 दिनों की इस लंबी वार्ता अवधि के दौरान दोनों पक्ष अंतिम समझौते को पूरी तरह लागू करने पर काम करेंगे, जिसे आवश्यकता पड़ने पर आगे भी बढ़ाया जा सकता है।

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