राजनीतिक संकट में उद्धव गुट, विधायकों पर भी नजरें टिकीं
मुंबई: महाराष्ट्र की सियासत में जून का महीना एक बार फिर शिवसेना (यूबीटी) के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। ठीक चार साल पहले, जून 2022 में एकनाथ शिंदे की अगुवाई में हुई बड़ी बगावत ने शिवसेना को दोफाड़ कर दिया था और महाविकास आघाडी की सरकार गिर गई थी। इतिहास खुद को दोहरा रहा है और जून 2026 में भी वैसे ही हालात बनते दिख रहे हैं। पार्टी के कई सांसदों का साथ छूटने के बाद अब उद्धव ठाकरे के सामने अपने विधायकों के कुनबे को बिखरने से बचाने का बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
'ऑपरेशन टाइगर-2' की आहट और मॉनसून सत्र का सस्पेंस
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सांसदों की बगावत के बाद अब विधायकों को साधने के लिए 'ऑपरेशन टाइगर-2' की जमीन तैयार की जा चुकी है। माना जा रहा है कि 22 जून से 10 जुलाई के बीच चलने वाले महाराष्ट्र विधानमंडल के मॉनसून सत्र के दौरान या ठीक उसके बाद इस योजना को अंजाम दिया जा सकता है। वर्तमान में 288 सदस्यों वाली महाराष्ट्र विधानसभा में उद्धव गुट के पास 20 विधायक हैं, जबकि विधान परिषद में उनके 6 सदस्य हैं। इस नाजुक मोड़ पर अपने सभी जनप्रतिनिधियों को एक पाले में बांधकर रखना ठाकरे नेतृत्व के लिए सबसे कड़ी परीक्षा होगी।
विपक्ष में सबसे मजबूत होने के बावजूद मंडराया खतरा
हालिया विधानसभा चुनाव में मनमुताबिक सफलता न मिलने के बाद भी विपक्षी गठबंधन 'महाविकास आघाडी' (MVA) के भीतर उद्धव ठाकरे की पार्टी के पास ही सबसे ज्यादा विधायकों की संख्या है। गठबंधन के अन्य सहयोगियों में कांग्रेस के पास 16 और शरद पवार की एनसीपी (एसपी) के पास 10 विधायक हैं। इसके विपरीत, सत्तासीन मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली असली शिवसेना के पास 57 विधायक और 8 विधान परिषद सदस्य हैं, जिससे उनका पलड़ा पहले से ही काफी भारी नजर आ रहा है।
सत्ता पक्ष का दावा और सियासी उलटफेर के संकेत
शिवसेना (शिंदे गुट) के वरिष्ठ नेता कृपाल तुमाने के एक हालिया बयान ने इस सियासी हलचल को और हवा दे दी है। उन्होंने दावा किया है कि उद्धव कैंप के 20 में से 16 विधायक इस समय शिंदे नेतृत्व के सीधे संपर्क में हैं। दूसरी तरफ, महाराष्ट्र के सामाजिक न्याय मंत्री और शिवसेना नेता संजय शिरसाट ने नपे-तुले अंदाज में कहा कि वे अपनी तरफ से कोई 'ऑपरेशन टाइगर' नहीं चला रहे हैं, लेकिन अगर विपक्ष का कोई बड़ा नेता स्वेच्छा से उनके साथ आना चाहता है, तो उसके लिए दरवाजे बंद नहीं किए जाएंगे। बहरहाल, आगामी मॉनसून सत्र में राज्य की राजनीति एक नया मोड़ ले सकती है।

CJP प्रदर्शन में शबाना आजमी की तबीयत बिगड़ी, अस्थमा अटैक के बाद दी हेल्थ अपडेट
संसद परिसर में कांग्रेस का विरोध, सरकार के खिलाफ बुलंद किए आवाज
कोरबा में पारिवारिक विवाद बना हत्याकांड, बड़े भाई को पुलिस ने लिया हिरासत में
सर्जरी की खबर निकली अफवाह, अमिताभ बच्चन बोले- चिंता की कोई बात नहीं
ट्रंप के टैरिफ प्लान से जेनेरिक दवाओं का कारोबार प्रभावित, भारत के लिए क्या मायने?
गुजरात में अवैध पटाखा फैक्ट्री बनी मौत का कारण, 10 लोगों की जान गई
गैस सिलेंडर खरीदने से पहले जान लें आज का रेट, क्या बढ़े हैं दाम?
पुश्तैनी जमीन पर कब्जे का आरोप, किसान सम्मान निधि के नाम पर हुई कथित ठगी
अफगानिस्तान क्रिकेट में नेतृत्व परिवर्तन, विश्व कप से पहले शाहिदी ने छोड़ी कमान