तेहरान का जवाब: ट्रंप की ‘जंग खत्म’ वाली घोषणा गलत
वाशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच फरवरी महीने से जारी सैन्य टकराव का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर देखने को मिल रहा है। हालांकि, कुछ समय के लिए संघर्ष विराम जरूर लागू हुआ था, लेकिन इसके बावजूद दोनों तरफ से छिटपुट हमले जारी रहे। इस तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा है कि दोनों देशों के बीच जारी यह जंग अब समाप्त हो चुकी है। ट्रंप के मुताबिक, इस वीकेंड तक यूरोप में शांति समझौते पर हस्ताक्षर होने की पूरी उम्मीद है। दूसरी तरफ, ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। व्हाइट हाउस में पत्रकारों से चर्चा करते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने ईरान के साथ एक बेहद शानदार डील तैयार कर ली है, जो जल्द ही अंतिम रूप ले लेगी।
ट्रंप का दावा और होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने का एलान
अमेरिकी राष्ट्रपति ने मीडिया से बातचीत में कहा कि इस शांति समझौते के लागू होते ही होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को आधिकारिक तौर पर पूरी तरह खोल दिया जाएगा। इसके बाद वहां से अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही पर लगी सभी पाबंदियां हट जाएंगी और व्यापार पहले की तरह सामान्य हो सकेगा। दिलचस्प बात यह है कि इस शांति घोषणा से ठीक पहले ट्रंप ने ईरान पर अब तक के सबसे भीषण हमले की चेतावनी दी थी, लेकिन ऐन वक्त पर उन्होंने अपने सैन्य आदेश को वापस ले लिया। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान भविष्य में कभी भी परमाणु हथियार न बनाने की शर्त पर राजी हो गया है।
ट्रंप पहले भी 38 बार कर चुके हैं ऐसा ही दावा
यह पहली बार नहीं है जब अमेरिकी राष्ट्रपति ने युद्ध खत्म होने की बात कही है। आंकड़ों के मुताबिक, वह अब तक अलग-अलग मौकों पर लगभग 38 बार जंग रोकने या समझौता होने का दावा कर चुके हैं। हालांकि, हर बार उनके ये दावे कुछ ही घंटों में जमीन पर धरे के धरे रह गए और दोनों देशों के बीच फिर से गोलाबारी शुरू हो गई। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ और कूटनीतिज्ञ ट्रंप के इस नए दावे को भी बेहद संदेह की नजर से देख रहे हैं।
ईरान ने अमेरिकी दावों को बताया हकीकत से दूर
डोनाल्ड ट्रंप के इस बयान पर ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। तेहरान का कहना है कि जब तक उनकी सरकार की तरफ से आधिकारिक तौर पर कोई घोषणा नहीं की जाती, तब तक अमेरिकी दावों में कोई सच्चाई नहीं है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि अभी तक किसी भी अंतिम समझौते पर मुहर नहीं लगी है। उनके मुताबिक, शांति प्रस्ताव अभी भी समीक्षा के दौर में है और कई बेहद संवेदनशील व महत्वपूर्ण मुद्दों पर आम सहमति बनना बाकी है।

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