गड़बड़ी पर सख्ती, आरती सिंह राव ने DDPO प्रमोद कुमार को सस्पेंड किया
नारनौल। प्रशासनिक कामकाज में ढिलाई, लापरवाही और अनुशासनहीनता के मामलों को लेकर हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने बेहद सख्त तेवर दिखाए हैं। नारनौल स्थित पीडब्ल्यूडी (PWD) रेस्ट हाउस में आयोजित जिला स्तरीय आला अधिकारियों की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक के दौरान कैबिनेट मंत्री ने ऑन-द-स्पॉट बड़ी दंडात्मक कार्रवाई की है। उन्होंने कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही बरतने के आरोप में जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी (DDPO) प्रमोद कुमार को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड (निलंबित) कर दिया है।
विकास कार्यों में खामियां और लेटलतीफी बनी निलंबन की मुख्य वजह
स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव आज नारनौल दौरे पर थीं, जहां वे जिले में चल रहे विभिन्न विकास प्रोजेक्ट्स और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की हकीकत परखने के लिए अधिकारियों की क्लास ले रही थीं। डीडीपीओ प्रमोद कुमार पर गाज गिरने के पीछे दो बड़े कारण सामने आए हैं। पहला यह कि जिले के ग्रामीण इलाकों में चल रहे विभिन्न पंचायत एवं विकास कार्यों में गंभीर विसंगतियां और वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतें मंत्री तक पहुंची थीं, जिससे वे बेहद खफा थीं। दूसरा, सरकार के कड़े निर्देशों के बावजूद डीडीपीओ इस अत्यंत महत्वपूर्ण और उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में तय समय पर पहुंचने के बजाय काफी देरी से पहुंचे, जिसे मंत्री ने अनुशासनहीनता की पराकाष्ठा माना।
लापरवाही पर त्वरित एक्शन से प्रशासनिक महकमे में मचा हड़कंप
सरकारी कामकाज में अधिकारियों की इस तरह की गैर-जिम्मेदाराना कार्यशैली और समय की पाबंदी न होने पर स्वास्थ्य मंत्री ने बिना कोई वक्त गंवाए कड़ा रुख अख्तियार किया। उन्होंने बैठक के बीच में ही डीडीपीओ प्रमोद कुमार के निलंबन पत्र जारी करने के आदेश प्रशासनिक अमले को दे दिए। कैबिनेट मंत्री द्वारा की गई इस औचक और बड़ी कार्रवाई से बैठक हॉल में सन्नाटा पसर गया और पूरे जिला प्रशासनिक तंत्र में हड़कंप मच गया है।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में सख्त संदेश
नारनौल में आयोजित इस हाई-प्रोफाइल बैठक में क्षेत्र के स्थानीय विधायक ओमप्रकाश यादव, जिले के उपायुक्त (कलेक्टर) के साथ-साथ तमाम विभागों के शीर्ष प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी मौजूद थे। सभी बड़े अफसरों की मौजूदगी में की गई इस कार्रवाई के जरिए स्वास्थ्य मंत्री ने पूरे प्रदेश के नौकरशाहों को एक कड़ा और सीधा संदेश दिया है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि जनहित से जुड़े विकास कार्यों में किसी भी स्तर पर बरती जाने वाली कोताही, लेटलतीफी और ढीला ढाला रवैया कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषी अधिकारियों के खिलाफ आगे भी ऐसी ही दंडात्मक कार्रवाई जारी रहेगी।

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