मध्य पूर्व संकट के बीच सोने की कीमतों में हल्की हलचल
मुंबई: मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारतीय सराफा बाजार में मंगलवार को सोने और चांदी की कीमतों में सुस्ती देखी जा रही है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर दोनों कीमती धातुएं एक सीमित दायरे में कारोबार करती नजर आईं और शुरुआती सत्र में लाल निशान के साथ हल्की गिरावट दर्ज की गई। वैश्विक अस्थिरता के इस दौर में जहां एक तरफ सैन्य टकराव की खबरें बाजार को प्रभावित कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर घरेलू स्तर पर डॉलर के मुकाबले रुपए की ऐतिहासिक कमजोरी ने निवेशकों की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
घरेलू बाजार में कीमती धातुओं की कीमतों का उतार-चढ़ाव
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर सोने के जून अनुबंध में मामूली गिरावट देखी गई, जहां कीमतें एक लाख उनचास हजार तीन सौ पच्चीस रुपए के स्तर पर बनी रहीं। कारोबार के दौरान सोने ने एक लाख उनचास हजार नौ सौ पचास रुपए का उच्चतम स्तर भी छुआ, लेकिन मांग में कमी के चलते यह ऊंचे स्तर पर टिक नहीं सका। वहीं चांदी के जुलाई अनुबंध में भी गिरावट का रुख रहा और यह दो लाख तैंतालीस हजार दो सौ बाईस रुपए प्रति किलोग्राम के स्तर पर कारोबार करती देखी गई। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी मिलाजुला रुझान देखने को मिल रहा है, जहां कॉमेक्स पर सोना हल्की बढ़त के साथ साढ़े चार हजार डॉलर के पार बना हुआ है, जबकि चांदी के भाव में गिरावट दर्ज की गई है।
मध्य पूर्व में सैन्य तनाव और ईरान-अमेरिका टकराव
वैश्विक बाजारों में इस अस्थिरता का मुख्य कारण मध्य पूर्व में पैदा हुआ नया सैन्य संकट माना जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया दावे ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में हलचल पैदा कर दी है, जिसमें उन्होंने ईरानी जहाजों को निशाना बनाने की बात कही है। अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, यह कार्रवाई होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए की गई थी। हालांकि ईरान ने अब तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन इस सामरिक क्षेत्र पर नियंत्रण को लेकर जारी खींचतान ने वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति के साथ-साथ धातु बाजार में भी अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है।
रुपए में रिकॉर्ड गिरावट और आर्थिक संकेतकों का प्रभाव
अंतरराष्ट्रीय उथल-पुथल के बीच भारतीय मुद्रा पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है और डॉलर के मुकाबले रुपया एक बार फिर कमजोर होकर बंद हुआ। इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक, रुपया सुबह कमजोरी के साथ खुलने के बाद संभल नहीं सका और अंततः पच्चीस पैसे से अधिक की गिरावट के साथ पिंचानवे दशमलव तैंतीस के स्तर पर पहुंच गया। रुपए के इस अवमूल्यन ने आयातित वस्तुओं की लागत बढ़ा दी है, जिससे घरेलू बाजार में कीमती धातुओं की कीमतों को एक तरफ समर्थन मिल रहा है, तो दूसरी तरफ वैश्विक मंदी की आशंका निवेशकों को सतर्क रहने पर मजबूर कर रही है।

Nestle India ने मारी बाजी, जून तिमाही में मुनाफा बढ़कर ₹959 करोड़ पहुंचा
छात्र आंदोलन पर नसीरुद्दीन शाह का फूटा गुस्सा, दिल्ली पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप
संसद में हुई पीएम मोदी-पवार-सुले की मुलाकात, राजनीतिक समीकरणों पर नजर
त्रिपाल तानकर दी गई अंतिम विदाई, श्मशान घाट की अव्यवस्था पर उठे सवाल
मनोरंजन जगत में शोक, 18 वर्षीय अभिनेत्री केली हॉटल का सड़क दुर्घटना में निधन
हरारे की पिच पर क्या कहता है रिकॉर्ड? बल्लेबाजों और गेंदबाजों के लिए कैसी रहेगी चुनौती?
काले कपड़ों में सांसदों का विरोध, संसद परिसर में बढ़ी राजनीतिक हलचल
सीएम थलपति ने NEET को बताया समस्या की जड़, परीक्षा खत्म करने की रखी मांग
बालेन शाह के बदले तेवर, भारत और चीन के राजदूतों से जल्द होगी बैठक