कोटा: राजस्थान के कोटा संभाग में स्थानीय प्रशासन, वन विभाग और कोटा विकास प्राधिकरण (केडीए) की हालिया कार्यप्रणालियों के खिलाफ विभिन्न सामाजिक संगठनों ने लामबंदी शुरू कर दी है। अतिक्रमण हटाने की आड़ में कथित उत्पीड़न के विरोध में गुर्जर, भील और अन्य समाजों ने आगामी 25 जून को एक बड़े विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है। इस जन-आंदोलन को धार देते हुए कोटा उत्तर के पूर्व विधायक प्रहलाद गुंजल ने बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर सूबे की सरकार और स्थानीय प्रशासन पर जमकर हमला बोला।

'वर्षों से रह रहे ग्रामीण परिवारों के साथ हो रहा है सौतेला व्यवहार'

प्रेस वार्ता के दौरान पूर्व विधायक प्रहलाद गुंजल ने आरोप लगाया कि गुर्जर सहित कई अन्य वंचित समाजों के लोगों को जानबूझकर प्रताड़ित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ खास वर्गों को निशाना बनाकर उनके मौलिक अधिकारों को छीना जा रहा है। जो ग्रामीण परिवार पीढ़ियों से अपने गांवों में शांतिपूर्वक निवास कर रहे हैं, उनके साथ प्रशासन भेदभावपूर्ण रवैया अपना रहा है। पारंपरिक रूप से जिन जंगलों का उपयोग ग्रामीण अपने मवेशियों को चराने और चारा लाने के लिए करते थे, वहां अब उन पर भारी-भरकम पेनाल्टी (जुर्माना) लगाई जा रही है, जिससे उनके सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट पैदा हो गया है।

विकास की आड़ में बेघर करने की नीति पर उठे सवाल

पूर्व विधायक ने कोटा विकास प्राधिकरण (KDA) की कार्रवाई पर तीखे सवाल खड़े करते हुए कहा कि अतिक्रमण हटाने के नाम पर गरीब परिवारों को उनके आशियाने से बेदखल किया जा रहा है और उनकी गुहार सुनने वाला कोई जिम्मेदार अधिकारी मौजूद नहीं है। इसी प्रशासनिक तानाशाही के खिलाफ अब सर्व समाज ने एकजुट होकर सड़कों पर उतरने और सरकार के खिलाफ बिगुल फूंकने का फैसला किया है।

'मजदूर और गरीब वर्ग खौफ के साए में जीने को मजबूर'

कोटा विकास प्राधिकरण को आड़े हाथों लेते हुए गुंजल ने कहा कि शहर का मजदूर और निर्धन तबका इस समय गहरे खौफ के माहौल में अपनी जिंदगी बसर कर रहा है। आज एक अदना सा बूट पॉलिश करने वाला कामगार भी प्रशासन के डर से अपनी पीड़ा बयां करने से कतरा रहा है, क्योंकि उसे डर है कि आवाज उठाने पर उसका रोजगार छीन लिया जाएगा। उन्होंने याद दिलाया कि किसी भी चुनी हुई लोक-कल्याणकारी सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी गरीबों को मान-सम्मान और रोजगार सुरक्षा देना होता है, न कि उनसे उनका आशियाना छीनना।

राजनीतिक दृष्टिकोण और आंदोलन की बड़ी तैयारियां

अपने सियासी सफर की चर्चा करते हुए प्रहलाद गुंजल ने कहा कि उन्होंने लंबे समय तक भाजपा की राजनीति की, लेकिन अब जब वह स्वतंत्र हैं, तो उनके विचारों और जनहित की आवाजों को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने साफ किया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में हर नागरिक को अपने हक की लड़ाई लड़ने का पूरा अधिकार है।

इस बीच, 25 जून को होने वाले इस विशाल प्रदर्शन को सफल बनाने के लिए विभिन्न समाजों के प्रतिनिधि और ग्रामीण क्षेत्रों के लोग जोर-शोर से तैयारियों में जुटे हुए हैं। अंदेशा जताया जा रहा है कि इस आंदोलन में हजारों की संख्या में लोग शामिल होकर कलेक्ट्रेट का घेराव कर सकते हैं।