बहादुरगढ़ नगर परिषद में राजनीतिक भूचाल, राजपाल शर्मा को हटाया गया
बहादुरगढ़: स्थानीय नगर परिषद के सियासी गलियारों में एक बहुत बड़ा उलटफेर देखने को मिला है, जिसने शहर की राजनीति की दशा और दिशा बदल दी है। लंबे समय से चल रही खींचतान के बाद आखिरकार नगर परिषद के वाइस चेयरमैन राजपाल शर्मा उर्फ पालेराम शर्मा को अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी है। पार्षदों द्वारा उनके खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव भारी बहुमत के साथ पारित हो गया है, जिसके चलते उन्हें अपने पद से तत्काल प्रभाव से हाथ धोना पड़ा। इस विशेष बैठक में शामिल हुए सभी छब्बीस पार्षदों ने एकजुट होकर निवर्तमान वाइस चेयरमैन के विरोध में मतदान किया, जिससे विपक्षी खेमे में भारी उत्साह देखा जा रहा है।
प्रशासनिक पहरे और कड़ी सुरक्षा के बीच मतदान की प्रक्रिया संपन्न
सत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए शुक्रवार, पंद्रह मई को नगर परिषद कार्यालय में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा और गुप्त मतदान के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक आहूत की गई थी। इस पूरी लोकतांत्रिक प्रक्रिया को पूरी तरह से निष्पक्ष, शांतिपूर्ण और पारदर्शी ढंग से पूरा कराने के लिए जिला प्रशासन की ओर से अतिरिक्त उपायुक्त (एडीसी) जगनिवास को विशेष तौर पर प्राधिकृत अधिकारी नियुक्त किया गया था। अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पुलिस प्रशासन द्वारा सुबह से ही नगर परिषद परिसर के भीतर और बाहर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे, जबकि शहर के प्रबुद्ध नागरिकों और राजनीतिक विश्लेषकों की निगाहें पल-पल बदलते घटनाक्रम पर टिकी हुई थीं।
चेयरपर्सन सहित छह पार्षदों ने बनाई महत्वपूर्ण बैठक से दूरी
इस बड़े सियासी शक्ति प्रदर्शन के दौरान संख्या बल का दिलचस्प गणित देखने को मिला, जहाँ बैठक में पहुंचे सभी छब्बीस पार्षदों ने बिना किसी मतभेद के अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में अपनी पर्ची डाली। दूसरी तरफ इस पूरे राजनैतिक ड्रामे के बीच नगर परिषद की चेयरपर्सन सरोज राठी ने अविश्वास प्रस्ताव की कार्यवाही से खुद को पूरी तरह दूर रखा। चेयरपर्सन के अलावा स्वयं निवर्तमान वाइस चेयरमैन राजपाल शर्मा, वार्ड छह के पार्षद राजेश तंवर, वार्ड आठ के पार्षद प्रवीन छिल्लर, वार्ड चौदह की पार्षद सविता सैनी और वार्ड बाईस के पार्षद प्रवीन ने भी इस अहम बैठक में हिस्सा नहीं लिया और अपनी अनुपस्थिति दर्ज कराई।
मार्च महीने में ही तैयार हो चुकी थी तख्तापलट की पूरी पटकथा
वाइस चेयरमैन की कार्यप्रणाली को लेकर पार्षदों के भीतर सुलग रही असंतोष की चिंगारी काफी समय पहले ही भड़क चुकी थी, जिसकी पटकथा मुख्य रूप से सत्रह मार्च को ही लिख दी गई थी। उस दौरान परिषद के पच्चीस पार्षदों ने एक राय होकर उपायुक्त को बकायदा एक कानूनी शपथ पत्र (हलफनामा) सौंपा था, जिसमें वर्तमान नेतृत्व पर अविश्वास जताते हुए विशेष बैठक बुलाने का आग्रह किया गया था। पार्षदों के इस सामूहिक कदम पर त्वरित संज्ञान लेते हुए उपायुक्त ने नौ अप्रैल को अतिरिक्त उपायुक्त जगनिवास को इस पूरी चुनावी और प्रशासनिक प्रक्रिया को अमलीजामा पहनाने की जिम्मेदारी सौंपी थी, जिसके तहत पंद्रह मई की तिथि मुकर्रर की गई थी।

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