इमरजेंसी के अध्याय पर राजनीतिक घमासान, कांग्रेस ने केंद्र पर साधा निशाना
नई दिल्ली। नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) ने एक बड़ा बदलाव करते हुए पहली बार कक्षा 9वीं की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक में वर्ष 1975 से 1977 के बीच देश में रहे आपातकाल (Emergency) पर एक विशेष खंड (सेक्शन) शामिल किया है। इस नए अध्याय में आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में आई "सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक" के रूप में परिभाषित किया गया है। इसके साथ ही पाठ्यक्रम में नागरिकों के मौलिक अधिकारों के निलंबन, प्रेस पर लगाई गई सेंसरशिप और तत्कालीन जयप्रकाश नारायण (JP) आंदोलन का भी विस्तृत उल्लेख किया गया है।
इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करने की हो रही कोशिश, बच्चों को गुमराह कर रही सरकार: विजय वडेट्टीवार
एनसीईआरटी द्वारा उठाए गए इस कदम पर अब राजनीतिक गलियारों में बयानबाजी तेज हो गई है। महाराष्ट्र कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक विजय वडेट्टीवार ने इस नए पाठ्यक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार और शिक्षा विभाग को आड़े हाथों लिया है। वडेट्टीवार ने मीडिया से औपचारिक बातचीत में आरोप लगाया, "यह स्कूली बच्चों को इतिहास के नाम पर गलत बातें सिखाने की कोशिश है। इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करना, अफवाहें फैलाना और नई पीढ़ी को गलत दिशा में ले जाना ही इस कदम का मुख्य उद्देश्य है।" उन्होंने तर्क दिया कि उस समय देश में जो विषम परिस्थितियां थीं, उनके मद्देनजर आपातकाल की आधिकारिक घोषणा नियमानुसार की गई थी, इसे किसी गुप्त एजेंडे के तहत लागू नहीं किया गया था।
आज देश में चल रहा है 'अघोषित आपातकाल'; कांग्रेस नेता का भाजपा सरकार पर तीखा तंज
कांग्रेस विधायक ने मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य की तुलना करते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर बड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा, "हमारे दृष्टिकोण से, देश में आज जो हालात हैं, वह 'अघोषित आपातकाल' जैसे हैं। आज कोई भी व्यक्ति वर्तमान सरकार की नीतियों के खिलाफ खुलकर अपनी आवाज बुलंद नहीं कर सकता और न ही खुलकर बात कर सकता है। यह स्थिति वर्तमान दौर की सबसे बड़ी कड़वी सच्चाई है।"
एआई (AI) और तकनीक के दौर में आज की पीढ़ी बहुत स्मार्ट, खुद करेगी तथ्यों की जांच
अपने बयान के अंत में विजय वडेट्टीवार ने आज की युवा पीढ़ी और स्कूली बच्चों की समझदारी की सराहना की। उन्होंने कहा कि आज के बच्चे बहुत होशियार और जागरूक हैं। उनके पास केवल स्कूल की किताबें ही नहीं, बल्कि आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (AI), इंटरनेट और सूचनाओं के कई अन्य आधुनिक स्रोत मौजूद हैं। कांग्रेस नेता ने भरोसा जताया कि नई पीढ़ी को किताबों के जरिए जो कुछ भी परोसा जाएगा, वे उसे बिना सोचे-समझे सच नहीं मानेंगे, बल्कि खुद डिजिटल माध्यमों से तथ्यों की गहराई से जांच-पड़ताल (फैक्ट चेक) करेंगे।

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