नर्सिंग स्टाफ की हड़ताल से राजस्थान में संकट, जयपुर में प्रदर्शन जारी
जयपुर। संविदा पर कार्यरत नर्सिंग कर्मी दीपक द्वारा सेवा से निष्कासित किए जाने के अवसाद में विषपान कर जान देने के मामले ने पूरे राजस्थान में एक बड़े आंदोलन का रूप ले लिया है। इस दुखद घटना के विरोध में प्रदेश के सरकारी चिकित्सालयों का नर्सिंग स्टाफ आज लगातार चौथे दिन भी अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार पर अड़ा हुआ है, जिसके कारण चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं।
एसएमएस मेडिकल कॉलेज के मुख्य द्वार पर नर्सिंग कर्मियों का बेमियादी धरना
आंदोलन के चौथे दिन भारी तादाद में नर्सिंग एसोसिएशन से जुड़े कर्मचारी जयपुर के प्रतिष्ठित सवाई मानसिंह (एसएमएस) मेडिकल कॉलेज के मुख्य गेट पर एकत्र हुए और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए विरोध प्रदर्शन किया। इसके अतिरिक्त, सुबह के समय महिला चिकित्सालय के बाहर भी कर्मियों ने एकत्र होकर रोष प्रकट किया। इस आंदोलन की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि संविदा कर्मियों के इस कदम को कई चिकित्सालयों में तैनात नियमित (परमानेंट) नर्सिंग स्टाफ का भी पूरा समर्थन मिल रहा है, जिससे ओपीडी, वार्ड और आपातकालीन (इमरजेंसी) सेवाएं बुरी तरह ठप हो गई हैं।
आश्रितों को एक करोड़ की सहायता और संविदा कर्मियों को स्थायी करने की मांग
प्रदर्शनकारियों ने सरकार के समक्ष अपनी मुख्य मांगें रखते हुए कहा है कि मृतक दीपक के शोकाकुल परिवार को तुरंत एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता राशि दी जाए, परिवार के किसी एक सदस्य को योग्यता के अनुसार सरकारी सेवा में लिया जाए और रहने के लिए आवास की व्यवस्था की जाए। इसके साथ ही, संगठन ने पूरे प्रदेश में कार्यरत लगभग सात हजार संविदा नर्सिंग कर्मचारियों को अविलंब नियमित करने तथा हाल ही में नौकरी से हटाए गए सभी कर्मियों को सेवा में वापस बहाल करने की पुरजोर मांग उठाई है। कर्मचारी प्रतिनिधियों का कहना है कि संविदा स्टाफ पूरे महीने निष्ठा से काम करता है, जिसके बदले उन्हें मात्र 7,000 रुपये का अल्प मानदेय दिया जाता है, जो वर्तमान समय में उनके साथ सरासर अन्याय है।
वार्ता विफल होने पर पूरे प्रदेश में उग्र आंदोलन की चेतावनी
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे पदाधिकारियों ने क्षोभ प्रकट करते हुए आरोप लगाया कि चार दिन बीत जाने के बाद भी शासन या प्रशासन की ओर से कोई भी जिम्मेदार नुमाइंदा उनसे संवाद स्थापित करने नहीं आया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी जायज मांगों की इसी प्रकार अनदेखी करना जारी रखा, तो आने वाले दिनों में इस विरोध प्रदर्शन को पूरे राजस्थान में और अधिक उग्र तथा व्यापक बनाया जाएगा। हालांकि, चिकित्सा विभाग के आला अधिकारियों का दावा है कि गतिरोध को समाप्त करने के लिए बीच का रास्ता निकालने का प्रयास किया जा रहा है, परंतु कर्मचारी अपनी मांगों पर पूरी तरह डटे हुए हैं, जिससे शासन पर दबाव निरंतर बढ़ता जा रहा है।

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