नवजात को गंभीर बीमारी से मिली राहत, इलाज के बाद पूरी तरह स्वस्थ
राजस्थान। झालावाड़ मेडिकल कॉलेज के एसआरजी एवं जनाना अस्पताल के डॉक्टरों ने अपनी बेजोड़ विशेषज्ञता और संवेदनशीलता की मिसाल पेश करते हुए एक 5 महीने के बच्चे को मौत के मुंह से बाहर निकाल लिया है। पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश के सुसनेर (सोयत) क्षेत्र के कंवरखेड़ी निवासी और पैरा मिलिट्री फोर्स के जवान राजेश डांगी के पांच वर्षीय पुत्र का सफल इलाज कर चिकित्सकों ने चिकित्सा जगत में एक बड़ी कामयाबी हासिल की है।
गर्दन नहीं संभाल पा रहा था बच्चा, जांच में सामने आई गंभीर बीमारी
पारिवारिक सूत्रों के मुताबिक, राजेश डांगी की पत्नी सरिता ने जनवरी 2026 में जुड़वा बच्चों को जन्म दिया था। कुछ समय बाद माता-पिता ने गौर किया कि दोनों में से एक बच्चा अपनी गर्दन ठीक से नहीं रोक पा रहा है। कई डॉक्टरों को दिखाने और सलाह लेने के बाद भी जब कोई सुधार नहीं हुआ, तो परेशान माता-पिता बच्चे को झालावाड़ मेडिकल कॉलेज के एसआरजी अस्पताल लेकर आए।
यहाँ न्यूरो सर्जरी विभाग के हेड डॉ. रामसेवक योगी ने शिशु की नाजुक हालत को देखते हुए उसे तुरंत एडमिट कर लिया। जब बच्चे के टेस्ट किए गए, तो पता चला कि वह 'हाइड्रोसिफलस' नाम की एक बेहद गंभीर बीमारी की चपेट में है। इस बीमारी में सिर के अंदर जरूरत से ज्यादा पानी (तरल पदार्थ) जमा हो जाता है, जो समय पर इलाज न मिलने पर जानलेवा साबित हो सकता है।
दूरबीन पद्धति से की गई मुश्किल सर्जरी
शिशु की उम्र महज पांच महीने होने के कारण यह ऑपरेशन डॉक्टरों के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं था। सीनियर डॉक्टरों की टीम ने आपस में चर्चा करने के बाद एंडोस्कोपी (दूरबीन तकनीक) के जरिए यह पेचीदा ऑपरेशन करने का फैसला किया। एक छोटे से छेद के रास्ते दिमाग की सर्जरी करना न्यूरो सर्जन्स के लिए जितना मुश्किल था, उतने छोटे बच्चे को सुरक्षित रूप से बेहोश (एनेस्थीसिया देना) करना भी उतना ही बड़ा जोखिम था।
विभिन्न विभागों के तालमेल से मिली सफलता
डॉक्टरों के हुनर, नर्सिंग स्टाफ की मुस्तैदी और अलग-अलग विभागों के बेहतरीन आपसी तालमेल से यह ऑपरेशन पूरी तरह कामयाब रहा। सर्जरी के बाद पीडियाट्रिक (बाल रोग) विभाग ने भी बच्चे की देखरेख में कोई कसर नहीं छोड़ी। लगातार डॉक्टरों की निगरानी में रहने के बाद बच्चा अब बिल्कुल ठीक है और तेजी से रिकवर कर रहा है। 15 जून को भर्ती हुए इस बच्चे का पूरा इलाज आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत अस्पताल अधीक्षक की विशेष अनुमति से बिल्कुल फ्री (निःशुल्क) किया गया, जिससे आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवार को बहुत बड़ा संबल मिला।
महंगे इलाज की चिंता से परेशान थे परिजन, इन डॉक्टरों ने बचाई जान
बच्चे के माता-पिता ने बताया कि वे बेटे की बीमारी को लेकर बेहद डर गए थे। वे जयपुर, दिल्ली और इंदौर जैसे बड़े शहरों के महंगे अस्पतालों के खर्च की बात सोचकर हताश हो चुके थे। ऐसे संकट के समय में झालावाड़ मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने उनके बच्चे को न सिर्फ नई जिंदगी दी, बल्कि उनके पूरे परिवार को एक नया हौसला भी दिया।
सफल टीम में ये रहे शामिल: इस ऐतिहासिक ऑपरेशन को अंजाम देने में न्यूरो सर्जरी विभाग के डॉ. रामसेवक योगी, डॉ. राम अवतार मालव और डॉ. चंदन सिंह, एनेस्थीसिया टीम के डॉ. उपेंद्र, डॉ. अटलराज व डॉ. संजीव गुप्ता और बाल रोग विभाग के डॉ. राजेंद्र नागर एवं डॉ. हेमाराम ने मुख्य भूमिका निभाई। इसके साथ ही नर्सिंग ऑफिसर कीर्ति मित्तल और कन्हैयालाल सुथार का भी सराहनीय योगदान रहा।

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