प्रेम बाईसा प्रकरण में नया मोड़, विषाक्तता की पुष्टि से इनकार
जोधपुर|जिले के पाल गांव स्थित आश्रम में 28 जनवरी को साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत की जांच अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। करीब 17 दिन बाद आई एफएसएल रिपोर्ट में किसी प्रकार के जहर की पुष्टि नहीं हुई है और न ही किसी स्पष्ट अप्राकृतिक कारण के संकेत मिले हैं। अब पोस्टमार्टम करने वाला मेडिकल बोर्ड एफएसएल रिपोर्ट सहित सभी चिकित्सकीय तथ्यों का विश्लेषण कर अंतिम मृत्यु कारण घोषित करेगा।मामले की गंभीरता को देखते हुए मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम कराया गया था और विसरा सैंपल जांच के लिए भेजे गए थे। जांच के लिए गठित एसआईटी ने व्यापक स्तर पर पड़ताल की। पुलिस ने अब तक 48 लोगों से पूछताछ कर लगभग 500 से अधिक पेज के बयान दर्ज किए हैं। इसके अलावा करीब 40 मोबाइल फोन की कॉल डिटेल रिकॉर्ड भी निकाली गई है, ताकि घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ा जा सके।
पूरी घटना का समय वार विश्लेषण
28 जनवरी शाम 5 बजे: पाल गांव आश्रम में तबीयत बिगड़ी।
5:15 बजे: कम्पाउंडर ने इंजेक्शन लगाया, हालत और बिगड़ी।
5:29 बजे: अस्पताल ले जाते समय मृत्यु हो गई।
7:30 बजे: प्रेक्षा अस्पताल से शव आश्रम लाया गया।
रात 9:30 बजे: कथित सुसाइड नोट इंस्टाग्राम पर पोस्ट हुआ, जिसके बाद हंगामा हुआ।
रात 1 बजे: शव महात्मा गांधी अस्पताल लाया गया।
29 जनवरी: मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम कराया गया।
30 जनवरी: पैतृक गांव परेऊ में समाधि दी गई।
2 फरवरी: एफएसएल टीम ने पुनः निरीक्षण किया।
3 फरवरी: विसरा जांच के लिए भेजा गया। अब मेडिकल बोर्ड अंतिम रूप से मृत्यु कारण घोषित करेगा।
गौरतलब है कि साध्वी की मौत के बाद बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हुए थे और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की थी। अब अंतिम चिकित्सकीय रिपोर्ट का इंतजार है, जिसके बाद मृत्यु के वास्तविक कारण पर स्थिति स्पष्ट होगी।

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