भारत-यूरोप संबंधों को नई दिशा, विदेश मंत्री का बयान
नई दिल्ली|भारत में यूरोपियन लीगल गेटवे ऑफिस के लॉन्च पर बुधवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर ने दोनों देशों के संबंध समेत कई मुद्दों पर बातचीत की। उन्होंने कहा कि हम वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहे हैं। जयशंकर ने बताया कि जोखिम कम करना अब एक बड़ी प्राथमिकता बन गई है, सप्लाई चेन का ढांचा बदला जा रहा है और तकनीक ने काम करने के तरीके बदल दिए हैं। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जनसांख्यिकी में भी बड़े बदलाव आ रहे हैं और अब वैश्विक कार्यबल का विचार तेजी से सामने आ रहा है।जयशंकर ने कहा कि ऐसे देश जो प्रतिभा के प्रवाह को अवसरों के साथ जोड़ सकें और इसमें कानून, पारदर्शिता और निष्पक्षता का ध्यान रखें, वे इस बदलाव का सबसे अच्छा फायदा उठा पाएंगे। उन्होंने एआई इम्पैक्ट समिट के बारे में कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य एआई की क्षमता को समझना था, जो सामाजिक और आर्थिक विकास को बढ़ा सकती है और विभाजन को कम कर सकती है और बड़े स्तर पर समाधान दे सकती है।
जयशंकर ने यूरोपीय लीगल गेटवे का दिया उदाहरण
इस दौरान जयशंकर ने यूरोप के लिए भारत का यूरोपीय लीगल गेटवे ऑफिस भी इसके उदाहरण के तौर पर बताया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ यूरोप में प्रवेश का जरिया नहीं है, बल्कि यह हमारे समाजों के बीच एक सेतु है, विश्वास का प्रतीक है और एक साझा, कुशल, गतिशील और मजबूत वैश्विक कार्यबल में निवेश है।
भारत यूरोप साझेदारी का भी जिक्र
इसके साथ ही विदेश मंत्री ने भारत-यूरोपियन यूनियन (ईयू) साझेदारी पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि हमारी साझेदारी सिर्फ साझा मूल्यों की वजह से ही नहीं, बल्कि इसलिए भी मजबूत है क्योंकि अब हम एक-दूसरे को प्राकृतिक और पसंदीदा साझेदार के रूप में देखते हैं।उन्होंने कहा कि भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर बातचीत का निष्कर्ष, सुरक्षा और रक्षा साझेदारी पर समझौता और 16वें भारत-ईयू शिखर सम्मेलन के अन्य ठोस निर्णय हमारे साझा भविष्य का रोडमैप पेश करते हैं। जयशंकर ने बताया कि शिखर सम्मेलन में 2030 तक की संयुक्त रणनीतिक एजेंडा को अपनाना हमारे रिश्तों का एक नया अध्याय खोलता है, जो आपसी समृद्धि, सुरक्षा और सतत विकास की दिशा में आगे बढ़ने का संकेत है।

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