नकली घी कारोबारियों पर बड़ी कार्रवाई, छापे में करोड़ों का खेल उजागर
जैसलमेर। सीमावर्ती जिले का परमाणु क्षेत्र 'पोकरण' इन दिनों मिलावटखोरों और नकली खाद्य पदार्थों का केंद्र बनता जा रहा है। खाद्य सुरक्षा विभाग ने यहाँ एक महीने के भीतर लगातार दूसरी बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक की है। मंगलवार की रात जैसलमेर खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने पोकरण के भवानीपुरा स्थित एक रिहायशी मकान में दबिश दी, जहाँ बड़े पैमाने पर नकली घी बनाने का अवैध कारोबार चल रहा था। एक महीने के भीतर नकली घी के खिलाफ हुई इस दूसरी बड़ी कार्रवाई से पूरे इलाके के व्यापारियों और मिलावटखोरों में हड़कंप मच गया है।
ब्रांडेड डिब्बों और रैपर्स का खेल; पुलिस की मदद से 900 किलो पाम ऑयल बरामद
खाद्य सुरक्षा अधिकारी किशनाराम कड़वासरा के नेतृत्व में पोकरण पुलिस के सहयोग से देर रात तक चली इस कार्रवाई में हैरान करने वाले खुलासे हुए हैं। इस अवैध फैक्ट्री से टीम ने 900 किलोग्राम पाम ऑयल और 453 किलोग्राम तैयार नकली घी बरामद किया है। इसके साथ ही मौके से नामचीन कंपनियों जैसे 'शक्ति' और 'डेयरी बैस्ट' सहित कई बड़े ब्रांड्स के नकली रैपर्स, खाली टिन, ढक्कन, पैकिंग मशीनें, गैस सिलेंडर और भट्टियां जब्त की गई हैं। मिलावटखोर इन नामी ब्रांड्स के डिब्बों में नकली घी भरकर धड़ल्ले से बाजार में असली के दाम पर बेच रहे थे।
केमिकल और एसेंस की 'वैज्ञानिक' ट्रिक; ऐसे बनता है पाम ऑयल से नकली घी
जांच में सामने आया कि मिलावटखोर बेहद शातिर और वैज्ञानिक तरीके से सस्ते पाम ऑयल को असली घी की शक्ल देते थे।
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सबसे पहले कच्चे पाम ऑयल को एक निश्चित तापमान पर उबाला जाता है।
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इसके बाद इसका 'हाइड्रोजनीकरण' (Hydrogenation) किया जाता है, जिससे तेल गाढ़ा और शुद्ध घी की तरह दानेदार हो जाता है।
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इसके बाद इसमें विशेष प्रकार के केमिकल और एसेंस (सुगंध) मिलाए जाते हैं, जिससे इसमें से हूबहू असली देसी घी जैसी खुशबू आने लगती है।
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आखिरी चरण में इसमें कृत्रिम पीला रंग मिलाया जाता है, ताकि यह दिखने में पूरी तरह गाय या भैंस का शुद्ध घी लगे।
विशेषज्ञों की चेतावनी: हार्ट अटैक और कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों का खतरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, पाम ऑयल और खतरनाक रसायनों से तैयार यह नकली घी इंसानी शरीर के लिए किसी धीमे जहर से कम नहीं है। डॉक्टरों का कहना है कि इस मिलावटी घी के सेवन से शरीर की धमनियां (Arteries) ब्लॉक हो जाती हैं, जिससे हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसमें इस्तेमाल होने वाले कृत्रिम रंग और एसेंस सीधे लिवर और किडनी को डैमेज करते हैं, जिससे इनके फेल होने की नौबत आ सकती है। लगातार इसके उपयोग से कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी हो सकती है, जबकि बच्चों में यह शारीरिक और मानसिक विकास को पूरी तरह रोक देता है। बाजार में बड़े ब्रांड के नाम पर मिल रहे इस जहर को लेकर अब आम जनता में भी भारी भय और चिंता का माहौल है।

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