भारत की अर्थव्यवस्था पर IMF का बड़ा अपडेट, ग्रोथ को लेकर दी राहतभरी खबर
नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती की सराहना की है। वैश्विक संस्था का कहना है कि मध्य पूर्व के संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल के बावजूद भारत की आर्थिक बुनियाद बेहद सुदृढ़ बनी हुई है। हालांकि, आईएमएफ ने चालू वर्ष 2026 के लिए भारत की विकास दर (ग्रोथ रेट) के अनुमान को मामूली रूप से संशोधित कर 6.4 प्रतिशत कर दिया है, लेकिन साथ ही यह भरोसा भी जताया है कि अगले साल ऊर्जा संकट का दबाव कम होते ही देश की जीडीपी रफ्तार पकड़ेगी।
आर्थिक आउटलुक में मामूली संशोधन और भविष्य के संकेत
आईएमएफ द्वारा जारी 'वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक' की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, भारत की वर्ष 2026 की अनुमानित विकास दर में अप्रैल के मुकाबले 0.1 प्रतिशत अंक की सूक्ष्म कटौती की गई है। इसके विपरीत, वर्ष 2027 के विकास अनुमान को 0.2 प्रतिशत अंक बढ़ाकर देश के आर्थिक परिदृश्य को और मजबूत बताया गया है। संस्था का मानना है कि उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन और घरेलू बाजार में वस्तुओं व सेवाओं की मजबूत मांग भारत की आर्थिक प्रगति को लगातार सहारा दे रही है।
वैश्विक चुनौतियों का भारत ने दृढ़ता से किया सामना
रिपोर्ट जारी करने के दौरान आईएमएफ के शीर्ष अधिकारियों ने रेखांकित किया कि भारत ने दुनिया की अन्य बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में वैश्विक भू-राजनीतिक उथल-पुथल का सामना कहीं अधिक परिपक्वता और मजबूती से किया है। हालांकि, पश्चिम एशिया में जारी सैन्य टकराव की वजह से ईंधन और ऊर्जा की आसमान छूती कीमतों का असर इस साल देश की कुल विकास दर पर थोड़ा दिखाई दे सकता है, जिसे एक तात्कालिक प्रभाव माना जा रहा है।
ऊर्जा संकट कम होते ही बढ़ेगी विकास की रफ्तार
आईएमएफ के अनुसंधान विभाग की प्रमुख डेनिज इगन ने प्रेस ब्रीफिंग में स्पष्ट किया कि हालिया आर्थिक आंकड़े उम्मीद से कहीं बेहतर रहे हैं। अप्रैल तक के हाई-फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर भी यही दर्शाते हैं कि देश के भीतर औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियां पूरी रफ्तार से चल रही हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि वर्ष 2027 में प्रवेश करते ही जैसे ही वैश्विक ऊर्जा बाजार का झटका कम होगा, वैसे ही भारत की विकास दर और अधिक मजबूत होकर मध्यमावधि में लगभग 6.5 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच जाएगी।
कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता और वैश्विक महंगाई का रुख
भारत अपनी कच्चे तेल की कुल आवश्यकता का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा विदेशों से आयात करता है, जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय कीमतें देश की महंगाई और चालू खाता घाटे (कैड) को सीधे प्रभावित करती हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट) जैसे रणनीतिक मार्गों से तेल की आपूर्ति बाधित होने पर भारत की आयात लागत बढ़ने का जोखिम हमेशा बना रहता है। इस बीच, आईएमएफ ने वैश्विक विकास दर का अनुमान 2026 के लिए 3 प्रतिशत पर स्थिर रखते हुए वैश्विक महंगाई दर का अनुमान बढ़ाकर 4.7 प्रतिशत कर दिया है, जहाँ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) क्षेत्र में हो रहा भारी निवेश आर्थिक नुकसान की भरपाई करने में मददगार साबित हो रहा है।

सुरंग में मलबा गिरने से बड़ा हादसा, 10 श्रमिकों की मौत पर पीएम ने जताया शोक
प्रदर्शन कर रहे कांग्रेस नेताओं पर पुलिस की कार्रवाई, राहुल-अखिलेश को लिया हिरासत में
हथियार छोड़ मुख्यधारा में लौटे KCP के 46 उग्रवादी, मणिपुर में शांति की नई उम्मीद
सीएम मोहन यादव का बड़ा वादा पूरा, UCC बिल विधानसभा से पास; जानिए आपके लिए क्या बदलेगा
मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना बनी सहारा, राज्य से बाहर भी मिल रहा निःशुल्क इलाज
पट्टा, नामांतरण और भवन स्वीकृति समेत कई मामलों का होगा समाधान, जेडीए ने शुरू किए शिविर
5.10 अरब रुपये के हर्जाने की मांग से Vedanta की बढ़ी मुश्किलें
एमपी विधानसभा में UCC बिल पारित, समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में बड़ा कदम
इस्तीफे की मांग पर अड़े राहुल, पीएम आवास के बाहर जारी रहेगा धरना