ग्रुप C कर्मचारियों को मिली कानूनी जीत, SLP खारिज होने से राहत
नई दिल्ली। देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) ने हरियाणा में ग्रुप-20 सहित कुल 24 विभिन्न ग्रुपों की भर्ती प्रक्रिया के पक्ष में एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के बीते 27 मार्च के फैसले को चुनौती देने वाली विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) को सिरे से खारिज कर दिया है। इस महत्वपूर्ण फैसले से विभिन्न विभागों में अपनी सेवाएं दे रहे 10,458 सरकारी कर्मचारियों की नौकरी पर मंडरा रहा खतरा पूरी तरह टल गया है और उनके सेवा में बने रहने का रास्ता साफ हो गया है।
हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने माना सही
इससे पहले पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में स्पष्ट किया था कि इन 24 ग्रुपों की भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह संपन्न हो चुकी है और चयनित उम्मीदवार लंबे समय से विभिन्न पदों पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में उन्हें बिना पक्षकार बनाए या उनका पक्ष सुने बिना उनके चयन को प्रभावित करना किसी भी तरह से न्यायसंगत नहीं है। इसी निर्णय को चुनौती देते हुए कुछ अभ्यर्थियों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, लेकिन शीर्ष अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर हाईकोर्ट के आदेश को पूरी तरह यथावत रखा है।
सामाजिक-आर्थिक अंकों के विवाद पर न्यायालय का रुख
उच्च न्यायालय ने अपने पूर्व के आदेश में यह भी साफ कर दिया था कि सामाजिक-आर्थिक आधार पर मिलने वाले अंकों का सीईटी-2 परीक्षा के लिए अभ्यर्थियों को बुलाने की मेरिट सूची पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा था। अदालत के अनुसार, पूर्व में भर्ती प्रक्रिया और सीईटी परिणामों को निरस्त करने संबंधी आदेशों में तकनीकी कमियां थीं। न्यायालय ने यह भी साफ किया कि भर्ती आयोग को भविष्य के लिए दिए गए दिशा-निर्देश केवल आगामी नई भर्तियों पर ही लागू होंगे और वर्तमान में नियुक्त सभी 10,458 कर्मी कानूनन अपनी सेवा में बने रहेंगे।
न्याय, सत्य और प्रदेश के युवाओं के धैर्य की जीत
इस बड़े फैसले पर खुशी जाहिर करते हुए हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग के अध्यक्ष हिम्मत सिंह ने कहा कि यह निर्णय हजारों अभ्यर्थियों के हित में आया है। उन्होंने इसे न्याय, सत्य और संघर्ष के साथ-साथ प्रदेश के युवाओं की मेहनत और धैर्य की बड़ी जीत बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पूरा आयोग हर कदम पर अभ्यर्थियों के अधिकारों की रक्षा के लिए मजबूती से खड़ा रहा और न्यायालय के समक्ष सभी तथ्यों व विधिक नियमों को बेहद प्रभावी ढंग से रखा, जिस पर देश की सर्वोच्च अदालत ने भी अपनी मुहर लगा दी है।

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