नासिक केस में ईडी की एंट्री, संपत्तियों पर नजर
महाराष्ट्र। नासिक में खुद को ‘गॉडमैन’ बताने वाले अशोक खरात की मुश्किलें बढ़ गई हैं. मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की मुंबई ज़ोन-II टीम ने सोमवार (13 अप्रैल) की सुबह से बड़ी कार्रवाई शुरू की है. यह कार्रवाई PMLA, 2002 की धारा 17 के तहत की जा रही है।
यह मामला 6 अप्रैल 2026 को दर्ज ECIR पर आधारित है, जो नासिक के सरकारवाड़ा पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR (25 मार्च 2026) से जुड़ा है. FIR में खरात पर जबरन वसूली, धार्मिक भावनाओं का गलत इस्तेमाल और महिलाओं समेत कई लोगों के साथ गंभीर अपराध करने के आरोप लगे हैं।
कैसे चलता था पूरा खेल
जांच में सामने आया है कि अशोक खरात ने नासिक की दो को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसायटी में कई फर्जी बैंक खाते खुलवाए थे. ये खाते अलग-अलग लोगों के नाम पर थे, लेकिन उनमें नॉमिनी खुद खरात ही था. इतना ही नहीं, सभी खातों में उसका मोबाइल नंबर लिंक था, जिससे वह इन खातों को कंट्रोल करता था। बताया जा रहा है कि वह आम चीजों को ‘आशीर्वाद वाली वस्तु’ बताकर बेचता था और दावा करता था कि उनमें इलाज करने की ताकत है. इसी बहाने लोगों से मोटी रकम वसूली जाती थी. बता दें कि बीते दिनों अशोक खरात के लगभगग 58 से ज्यादा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे. इन वीडियो से हड़कंप मच गया था।
पैसों का क्या हुआ?
ED की शुरुआती जांच में पता चला है कि ठगी और वसूली से जुटाए गए पैसों को जमीनों में निवेश किया गया. इसमें उसका चार्टर्ड अकाउंटेंट प्रकाश पोफले और उसके बेटे भी शामिल बताए जा रहे हैं।
कहां-कहां हो रही है छापेमारी
आज ED की टीम ने एक साथ कई जगहों पर रेड मारी है. नासिक में 5 ठिकाने पर जिसमें पुणे में 3 ठिकाने, शिर्डी में 3 ठिकाने है. इनमें खरात, उसके CA और उनके रिश्तेदारों के घर-ऑफिस के साथ-साथ संबंधित को-ऑपरेटिव सोसायटी की शाखाएं भी शामिल हैं।

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