डेरा गाजी खान में भूकंप से हिली धरती, पाकिस्तान में फिर बढ़ी चिंता
इस्लामाबाद। दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला में आए भीषण भूकंप की त्रासदी के बीच अब पड़ोसी देश पाकिस्तान में भी भूगर्भीय हलचल तेज हो गई है। शनिवार सुबह पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के अंतर्गत आने वाले डेरा गाजी खान क्षेत्र और उसके आस-पास के इलाकों में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। रिक्टर पैमाने पर इस भूकंप की तीव्रता 5.4 आंकी गई है। हालांकि, राहत की बात यह रही कि इस प्राकृतिक आपदा के कारण तत्काल किसी भी प्रकार के जान-माल के नुकसान या बड़ी तबाही की कोई खबर सामने नहीं आई है, लेकिन स्थानीय प्रशासन पूरी तरह सतर्क है और स्थिति की निगरानी कर रहा है।
भूकंप का समय, तीव्रता और केंद्र की स्थिति
स्थानीय समय के अनुसार यह भूकंप सुबह 8:53 बजे आया, जिसने लोगों को डरा दिया। भू-वैज्ञानिकों के मुताबिक भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 5.4 दर्ज की गई और इसका मुख्य केंद्र डेरा गाजी खान के निकटवर्ती क्षेत्र में जमीन के भीतर लगभग 75 किलोमीटर की गहराई पर स्थित था। झटके इतने तेज थे कि धरती हिलते ही घबराए लोग अपने घरों, दुकानों और बहुमंजिला इमारतों से सुरक्षा के लिए तुरंत खुले मैदानों की तरफ भागने लगे।
पाकिस्तान की भौगोलिक संवेदनशीलता और पूर्व के झटके
पाकिस्तान में पिछले कुछ समय से लगातार भूकंपीय गतिविधियां देखी जा रही हैं। इस घटना से ठीक एक दिन पहले, यानी शुक्रवार को भी देश के बलूचिस्तान प्रांत के विभिन्न हिस्सों में धरती कांपी थी। भौगोलिक संरचना के दृष्टिकोण से पाकिस्तान एक अत्यधिक संवेदनशील फॉल्ट लाइन क्षेत्र में स्थित है, जिसके कारण यहां समय-समय पर टेक्टोनिक प्लेटों में टकराव होने से भूकंप आते रहते हैं। भू-गर्भ शास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि ऐसे संवेदनशील इलाकों में रहने वाले नागरिकों को सुरक्षा मानकों के प्रति हमेशा सजग रहना चाहिए।
वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप का असर और वर्तमान स्थिति
पाकिस्तान में आई इस प्राकृतिक आपदा ने लोगों का ध्यान वेनेजुएला की ओर भी खींचा है, जो वर्तमान में इतिहास के सबसे भीषण भूकंपों में से एक का सामना कर रहा है। बीते बुधवार को वेनेजुएला में 7.2 और 7.5 की तीव्रता वाले दो अत्यंत विनाशकारी भूकंप आए थे, जिन्होंने वहां भारी तबाही मचाई है। कई रिहायशी इमारतें और बुनियादी ढांचे जमींदोज हो गए हैं, जिससे हजारों लोग बेघर हो चुके हैं। मलबे में दबे जीवित लोगों को निकालने के लिए अंतरराष्ट्रीय बचाव दल और राहत एजेंसियां युद्ध स्तर पर काम कर रही हैं, हालांकि बुनियादी सुविधाएं ठप होने से दुर्गम इलाकों तक पहुंचना अब भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

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