जबलपुर: मध्य प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री और सतना जिले की रैगांव विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (BJP) की विधायक प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण-पत्र को चुनौती देने वाली याचिका के बाद प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार (इटारसी निवासी) द्वारा हाई कोर्ट में दायर की गई इस याचिका पर अब आयुक्त अनुसूचित जाति विकास विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए राज्यमंत्री के खिलाफ एक आधिकारिक नोटिस जारी किया है।

फर्जी प्रमाण-पत्र के जरिए चुनाव जीतने का आरोप

उच्च न्यायालय (जबलपुर) में पेश की गई याचिका में यह गंभीर आरोप लगाया गया है कि प्रतिमा बागरी ने सतना जिले की अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित रैगांव विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। नामांकन के दौरान उन्होंने खुद को एससी वर्ग का साबित करने के लिए जो प्रमाण-पत्र पेश किया था, वह कथित तौर पर नियमों के विरुद्ध है। याचिकाकर्ता का दावा है कि प्रतिमा बागरी मूल रूप से अनुसूचित जाति वर्ग के अंतर्गत नहीं आती हैं और उन्होंने चुनाव लड़ने के लिए गलत दस्तावेजों का सहारा लिया था।

मंत्रालय में 6 जुलाई को होगी महत्वपूर्ण बैठक

जांच समिति के समक्ष पेशी:

इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए अनुसूचित जाति विकास विभाग के आयुक्त ने राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी को नोटिस भेजकर व्यक्तिगत रूप से पेश होने के निर्देश दिए हैं। राज्य स्तरीय अनुसूचित जाति छानबीन समिति की यह महत्वपूर्ण बैठक आगामी 6 जुलाई 2026 को सुबह 11:00 बजे भोपाल स्थित वल्लभ भवन (मंत्रालय) के ब्लॉक-1, कक्ष क्रमांक-312 में आयोजित की जाएगी।

आधिकारिक आदेश में दिए गए निर्देश

विभाग द्वारा जारी किए गए नोटिस में साफ तौर पर लिखा गया है:

"अनुसूचित जाति वर्ग के संदेहास्पद जाति प्रमाण-पत्रों की सत्यता जांचने के लिए गठित उच्च स्तरीय छानबीन समिति की बैठक तय की गई है। माननीय राज्यमंत्री को निर्देशित किया जाता है कि वे वर्ष 1950 की स्थिति में स्वयं और अपने परिवार के सतना जिला (मध्य प्रदेश) के निवासी होने के पुख्ता प्रमाण पेश करें। इसके साथ ही, वे 'बागरी' अनुसूचित जाति का सदस्य होने को प्रमाणित करने वाले सभी आवश्यक साक्ष्यों, दस्तावेजों और मूल अभिलेखों के साथ निर्धारित समय एवं तिथि को समिति के सामने उपस्थित होकर अपना पक्ष रखें।"