साउथ का सियासी ट्रेंड: क्यों दक्षिण भारत में सितारों के लिए आसान है सत्ता की राह?
सिनेमाई पर्दे से सत्ता के शिखर तक: एक विस्तृत सफर
एम जी रामचंद्रन (एमजीआर): राजनीति के 'भगवान' 1936 में फिल्मी करियर शुरू करने वाले एमजीआर ने तीन दशकों तक तमिल सिनेमा पर राज किया। 1947 में आई फिल्म 'राजकुमारी' ने उन्हें सुपरस्टार बना दिया। राजनीति में उनकी पारी डीएमके से शुरू हुई, लेकिन मतभेदों के बाद उन्होंने अपनी पार्टी AIADMK बनाई। 30 जून 1977 को वे मुख्यमंत्री बने और 1987 तक इस पद पर रहे। उनके द्वारा शुरू की गई 'मिड डे मील' योजना आज भी देश के लिए मिसाल है।
जयललिता: संघर्ष से सत्ता तक की दास्तां जयललिता का फिल्मी सफर महज 15 साल की उम्र से शुरू हुआ था। उन्होंने लगभग 140 फिल्मों में काम किया, जिनमें से 28 फिल्में एमजीआर के साथ थीं। एमजीआर के निधन के बाद वे उनकी राजनीतिक उत्तराधिकारी बनीं। 1989 में विधानसभा में उनके साथ हुई बदसलूकी ने उनके संकल्प को और मजबूत किया और 1991 में उन्होंने पहली बार मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली।
एन टी रामा राव (एनटीआर): पर्दे के 'कृष्ण' जो बने सीएम आंध्र प्रदेश के एनटीआर ने अपने 40 साल के फिल्मी करियर में 300 से अधिक फिल्में कीं। पौराणिक फिल्मों में उनके द्वारा निभाए गए भगवान कृष्ण और राम के किरदारों ने उन्हें जनता के बीच पूजनीय बना दिया। 1982 में तेलुगु देशम पार्टी (TDP) की स्थापना के महज 9 महीने बाद वे मुख्यमंत्री बन गए थे।
रजनीकांत: घोषणा और संन्यास का सफर सुपरस्टार रजनीकांत ने 1975 में अपना करियर शुरू किया और 170 से अधिक फिल्में कीं। 1996 में उनके एक बयान ने राज्य की राजनीति पलट दी थी। हालांकि, प्रशंसकों के लंबे इंतजार के बाद 2017 में राजनीति में आने की घोषणा करने वाले रजनीकांत ने 2021 में स्वास्थ्य कारणों से राजनीति से संन्यास ले लिया।
कमल हासन और विजयकांत बहुमुखी प्रतिभा के धनी कमल हासन ने 2018 में 'मक्कल नीधि मय्यम' बनाई और वर्तमान में वे राज्यसभा सांसद के रूप में सक्रिय हैं। वहीं, विजयकांत (कैप्टन) ने डीएमडीके पार्टी के जरिए अपनी ताकत दिखाई और 2011 में मुख्य विपक्षी नेता की भूमिका निभाई।
पवन कल्याण और थलापति विजय: नया दौर 'पॉवर स्टार' पवन कल्याण ने 2014 में जन सेना पार्टी बनाई और 2024 के चुनावों में ऐतिहासिक जीत दर्ज कर आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बने। अब सबकी निगाहें थलापति विजय पर हैं, जिन्होंने 'तमिलगा वेत्री कझगम' (टीवीके) के साथ औपचारिक रूप से राजनीति में प्रवेश किया है। आगामी चुनाव उनके राजनीतिक भाग्य का फैसला करेंगे।

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