Palash के पेड़ों पर खिले पीले फूलों ने बदली जंगल की रंगत
माधोपुर। सवाई माधोपुर के बौंली स्थित गोल वन क्षेत्र से प्रकृति का एक अद्भुत नजारा सामने आया है। यहाँ सैकड़ों केसरिया पलाश के पेड़ों के बीच पीले पलाश के दो दुर्लभ पेड़ों ने अपनी चमक से सभी को हैरान कर दिया है। आमतौर पर पलाश को इसके चटक नारंगी रंगों के कारण 'फ्लेम ऑफ द फॉरेस्ट' (जंगल की ज्वाला) कहा जाता है, लेकिन पीले फूलों वाला यह पलाश अत्यंत दुर्लभ श्रेणी में आता है।
क्या है इसकी खासियत?
वैज्ञानिक दृष्टि से इस दुर्लभ प्रजाति को ब्यूटिया मोनोस्पर्मा ल्यूटिया कहा जाता है। यह सामान्य पलाश से काफी भिन्न और दुर्लभ है।
- पहली झलक: वन विभाग के अनुसार, इस क्षेत्र में करीब दो साल पहले पहली बार पीला पलाश देखा गया था, और अब एक बार फिर इनका खिलना पर्यावरण के नजरिए से बेहद सुखद संकेत है।
- संरक्षण की जरूरत: यह प्रजाति 'संरक्षित श्रेणी' में आती है। राजस्थान में यह मुख्य रूप से उदयपुर और चित्तौड़गढ़ जैसे दक्षिणी हिस्सों में पाई जाती है, लेकिन सवाई माधोपुर में इसका मिलना वन विशेषज्ञों के लिए शोध का विषय है।
वन विभाग की विशेष योजना
दुर्लभ प्रजाति के इन पेड़ों को बचाने के लिए वन विभाग ने कमर कस ली है:
- मार्किंग और मॉनिटरिंग: गश्त के दौरान टीम ने इन पेड़ों को चिन्हित कर इनकी फोटोग्राफी की है और उच्च अधिकारियों को इसकी रिपोर्ट सौंपी है।
- पौधशाला की तैयारी: वन विभाग अब इन पेड़ों के बीज एकत्रित कर विशेष नर्सरी तैयार करेगा। इन पौधों को जिले के अन्य हिस्सों में भी रोपित करने की योजना है ताकि इस दुर्लभ प्रजाति की संख्या बढ़ाई जा सके।
पलाश के औषधीय और सांस्कृतिक लाभ
पलाश न केवल जंगल की सुंदरता बढ़ाता है, बल्कि इसके कई अन्य लाभ भी हैं:
- प्राकृतिक रंग: पुराने समय में होली के सुरक्षित और हर्बल रंग इन्हीं फूलों को उबालकर तैयार किए जाते थे।
- आयुर्वेद: पलाश के फूलों और छाल में कई औषधीय गुण होते हैं, जिनका उपयोग विभिन्न बीमारियों के उपचार में किया जाता है।
प्रकृति प्रेमियों के लिए बना आकर्षण
रणथंभौर और सवाई माधोपुर का इलाका आमतौर पर केसरिया पलाश के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन इन दो पीले पलाश के पेड़ों ने पूरे क्षेत्र की खूबसूरती में चार चांद लगा दिए हैं। यदि वन विभाग का यह संरक्षण अभियान सफल रहता है, तो आने वाले समय में सैलानियों और प्रकृति प्रेमियों के लिए केसरिया और पीले पलाश का यह अनूठा संगम एक बड़ा पर्यटन आकर्षण बन सकता है।

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