वैशाली में सनसनी, दिव्यांग बच्चे की मौत के बाद शव सड़क किनारे फेंकने का मामला
वैशाली।बिहार के वैशाली जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने समाज को शर्मसार कर दिया है। एक तीन वर्षीय बच्चे की मौत के बाद उसकी नानी समाज के डर और बहिष्कार के कारण उसका शव सड़क किनारे फेंकने को मजबूर हो गई। बताया जा रहा है कि बच्चा अपनी नानी के घर रहता था और वहीं उसकी मौत हो गई। समाज के समर्थन के अभाव और पहले से लगे आरोपों के कारण महिला ने किसी से मदद नहीं मांगी और अपने नाती का शव घर से कई किलोमीटर दूर ले जाकर फेंक दिया।
समाज से बहिष्कार का डर बना बड़ी वजह
जानकारी के अनुसार महिला की बेटी ने दो शादियां की थीं, जिसके चलते समाज के लोगों ने कई तरह के आरोप लगाकर महिला को पहले ही समाज से अलग कर दिया था। गांव के लोग न तो उससे बातचीत करते थे और न ही उसके घर के आसपास आने-जाने वाले लोग उससे कोई संबंध रखते थे। इसी डर के कारण महिला समाज के लोगों को बच्चे की मौत के बारे में बता नहीं सकी। उसे यह आशंका थी कि अगर वह लोगों को बताएगी तो भी कोई उसका साथ नहीं देगा। इसी वजह से उसने बच्चे के शव को घर से दूर ले जाकर फेंक देना ही बेहतर समझा।
दिव्यांग था बच्चा, कई जगह कराया गया था इलाज
बताया जाता है कि बच्चा दिव्यांग था। महिला की बेटी की दूसरी शादी के बाद बच्चे का जन्म हुआ था। महिला की बेटी की शादी वैशाली जिले के सराय थाना क्षेत्र के धर्मपुर गांव में हुई थी। बच्चा तीन साल का हो चुका था और वह शारीरिक रूप से पूरी तरह दिव्यांग था। परिवार के लोगों ने कई जगह उसका इलाज कराया, लेकिन उसकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। इसी कारण वह अपनी नानी के घर पर ही रहकर पालन-पोषण पा रहा था।
शादी समारोह के दौरान हुई बच्चे की मौत
25 फरवरी को बच्चे की मां के ससुराल में एक शादी समारोह था। उस दौरान मां बच्चे को उसकी नानी के पास छोड़कर समारोह में चली गई। उसी रात अचानक बच्चे की मौत हो गई। नानी ने इस घटना की जानकारी बच्चे की मां को दी। मां ने बच्चे के शव का दाह संस्कार करने के लिए कहा, लेकिन नानी को समाज का साथ नहीं मिला। इसके बाद नानी ने बच्चे के शव को हाजीपुर के सदर थाना क्षेत्र के रजौली इलाके में सड़क किनारे फेंक दिया।
3 मार्च को मिला शव, 6 मार्च को हुई पहचान
3 मार्च को पुलिस को सड़क किनारे एक बच्चे का शव मिला था, जिसकी पहचान उस समय नहीं हो सकी थी। पुलिस ने आवश्यक कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया और मामले की जांच शुरू कर दी। 6 मार्च को शव की पहचान वैशाली जिले के सराय थाना क्षेत्र के धर्मपुर गांव निवासी गुड्डू सिंह के तीन वर्षीय पुत्र अंश कुमार के रूप में हुई।
जांच में सामने आई नानी की भूमिका
पुलिस जांच में पता चला कि बच्चे की नानी वैशाली जिले के महुआ थाना क्षेत्र के सुरतपुर विद्या गांव की रहने वाली संगीता देवी है। इसके बाद पुलिस ने बच्चे की नानी और उसकी मां दोनों को थाने पर बुलाकर पूछताछ की।
मामले की जांच में जुटी पुलिस
पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि बच्चे की मौत के बाद उसकी मां पूरी घटना को लेकर चुप रही। यदि मां और नानी चाहतीं तो बच्चे का अंतिम संस्कार हिंदू रीति-रिवाज से किया जा सकता था, लेकिन सामाजिक बहिष्कार और डर के कारण ऐसा नहीं हो सका। इस घटना ने एक बार फिर समाज और संवेदनाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जहां एक दिव्यांग बच्चे को मौत के बाद भी सम्मान नहीं मिल सका। पुलिस द्वारा शव की पहचान होने के बाद उसे परिजनों को सौंप दिया गया है। इस संबंध में सदर थाना प्रभारी मुकेश कुमार ने बताया कि पुलिस ने नानी से लिखित आवेदन लिया है। शव का पोस्टमार्टम कराया गया है और विसरा सुरक्षित रखा गया है। पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है।

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