बिहार की राजनीति में नई चर्चा: मदन सहनी के बयान से राज्यसभा मुद्दा गरमाया
दरभंगा। होली के मौके पर जहां पूरे बिहार में उत्सव का माहौल है, वहीं राजनीतिक गलियारों में मुख्यमंत्री को राज्यसभा भेजे जाने की चर्चाओं ने हलचल बढ़ा दी है। बिहार सरकार में जदयू के समाज कल्याण मंत्री मदन सहनी ने इस तरह के निर्णय पर संदेह जताया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के राज्यसभा जाने का कोई औचित्य उन्हें नजर नहीं आता।
'राज्यसभा जाने के फैसले पर संदेह'
मंत्री मदन सहनी ने कहा कि विभिन्न चैनलों के माध्यम से यह जानकारी मिल रही है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को राज्यसभा भेजा जा सकता है, लेकिन उन्हें इसका कोई औचित्य समझ में नहीं आता। उन्होंने स्पष्ट कहा कि उन्हें भरोसा नहीं है कि राज्यसभा जाने का निर्णय स्वयं मुख्यमंत्री जी का हो सकता है। ऐसा फैसला वे खुद लेंगे, इस पर भी उन्हें संदेह है। उन्होंने कहा कि अभी सरकार बने दो-चार महीने भी नहीं हुए हैं और मुख्यमंत्री के नेतृत्व में सरकार बेहतर काम कर रही है। ऐसे समय में मुख्यमंत्री का पद छोड़कर केंद्र की राजनीति में जाना क्यों आवश्यक होगा, यह बड़ा सवाल है।
मांझी मुख्यमंत्री बन सकते हैं, तो निशांत डिप्टी सीएम क्यो नहीं?
डिप्टी सीएम के तौर पर निशांत कुमार के नाम की चर्चाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए मदन सहनी ने कहा कि इसमें कोई असंभव बात नहीं है। जब पहले जीतन राम मांझी मुख्यमंत्री बन सकते हैं, तो निशांत जी उपमुख्यमंत्री क्यों नहीं बन सकते? यह कोई बड़ी बात नहीं है। हालांकि उन्होंने यह भी दोहराया कि मुख्यमंत्री का पद छोड़कर केंद्र में जाना कितना लाभकारी होगा, इस पर विचार होना चाहिए।
मुख्यमंत्री लेंगे आखिरी फैसला
मदन सहनी ने यह भी कहा कि वे लंबे समय से चाहते हैं कि निशांत जी सक्रिय राजनीति में आएं और पार्टी का नेतृत्व संभालें। हम लोग कई महीनों से इंतजार में हैं कि निशांत जी राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाएं और जनता दल (यू) के एक नेता के रूप में जिम्मेदारी अपने कंधों पर लें। हम उनके साथ पहले भी थे और आगे भी सहयोग के लिए तैयार हैं। हालांकि पार्टी को संभावित नुकसान के सवाल पर उन्होंने टिप्पणी करने से परहेज किया और कहा कि अंतिम निर्णय स्वयं मुख्यमंत्री ही लेंगे।

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